चंदौली में AIPF का हल्लाबोल: SIR रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर दमन की निंदा
एसआईआर तत्काल रद्द करने मांग
सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा मांग
2023 चुनाव आयुक्त कानून विरोध
एआईपीएफ नेता अजय राय जनसंवाद
राष्ट्रपति को ईमेल द्वारा पत्रक
गांधी जयंती के अवसर पर देश भर में चलाए जा रहे एसआईआर (SIR) को तत्काल रद्द करने की मांग जोर पकड़ रही है। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) ने असंवैधानिक और अनधिकृत तरीके से कार्य करने का आरोप लगाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तुरंत इस्तीफे की मांग की है। इसके साथ ही वर्ष 2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को रद्द करने की भी वकालत की गई है।
आंदोलन पर हो रहे दमन की एआईपीएफ ने की निंदा
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट के राष्ट्रीय समिति सदस्य अजय राय ने देश भर में चल रहे शांतिपूर्ण आंदोलनों पर हो रहे बर्बर दमन और गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और मुंबई के आजाद मैदान जैसे निर्धारित धरना स्थलों पर भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अनुमति न देना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने सरकार से तानाशाही रवैया छोड़कर जवाबदेह बनने का आग्रह किया।
गांवों में जनसंवाद कर राष्ट्रपति को भेजा गया पत्रक
गांधी जयंती पर विपक्षी दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समाज के विरोध प्रदर्शन के समर्थन में अजय राय ने चंदौली के कई गांवों में जनसंवाद किया। इस दौरान सैकड़ों ग्रामीणों के हस्ताक्षर युक्त पत्रक को ईमेल के माध्यम से भारत की महामहिम राष्ट्रपति को भेजा गया। पत्र में स्पष्ट किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त को अपने पद पर बने रहने का कोई नैतिक और संवैधानिक अधिकार नहीं रह गया है।
संवैधानिक लोकतंत्र बचाने की देशवासियों से अपील
ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट ने देश की तमाम लोकतांत्रिक ताकतों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे संवैधानिक लोकतंत्र की रक्षा के लिए इस राष्ट्रव्यापी आंदोलन से जुड़ें। फ्रंट का कहना है कि चुनावी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों की बहाली के बिना देश का लोकतंत्र सुरक्षित नहीं रह सकता।
गांधी जयंती पर एआईपीएफ का राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद दिवस
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (AIPF) और रोजगार-सामाजिक अधिकार अभियान की ओर से चंदौली में राष्ट्रव्यापी प्रतिवाद दिवस का आयोजन किया गया। इस दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और साख पर सवाल उठाते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। इसके बाद जिलाधिकारी चंदौली के माध्यम से भारत की महामहिम राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और जांच की मांग
एआईपीएफ के राष्ट्रीय समिति सदस्य अजय राय के नेतृत्व में दिए गए इस ज्ञापन में भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए फैसलों को संविधान विरोधी और अवैधानिक बताते हुए उनसे तत्काल इस्तीफे की मांग की गई है। साथ ही संगठन ने मांग की है कि निर्वाचन आयोग के हालिया कामकाज और निर्णयों की एक स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच कराई जाए।
13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाने और SIR का विरोध
संगठन ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पर कड़ा ऐतराज जताया है। ज्ञापन में कहा गया है कि एसआईआर और अन्य प्रक्रियाओं के जरिए देशभर में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे लोकतंत्र के समक्ष बड़ा संकट पैदा हो गया है। एआईपीएफ का कहना है कि संविधान और जनप्रतिनिधित्व कानून के तहत आयोग को इस प्रकार की मनमानी प्रक्रिया चलाने का कोई वैधानिक अधिकार नहीं है, इसलिए एसआईआर पर तुरंत रोक लगाकर हटाए गए पात्र मतदाताओं के नाम बहाल किए जाएं।
2023 के चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को रद्द करने की मांग
ज्ञापन के जरिए वर्ष 2023 में संसद द्वारा बनाए गए निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए कानून को भी रद्द करने की मांग की गई है। एआईपीएफ ने तर्क दिया कि नियुक्ति समिति से भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को हटाना और आयुक्तों को ताउम्र विधिक सुरक्षा देना आयोग की स्वतंत्रता को प्रभावित करता है। संगठन ने मांग की है कि चुनाव आयोग की स्वायत्तता बनाए रखने के लिए नियुक्ति समिति में मुख्य न्यायाधीश को पुनः शामिल किया जाए।