बड़गावां में अंजुमन के युवाओं ने पेश किए पारंपरिक खेल, परंपरा और भाईचारे का संगम
बड़गावां में अंजुमन ने मनाया चेहल्लूम का आयोजन
अखाड़े में युवाओं ने पेश किए पारंपरिक खेल और करतब
नसीरपुर और कैमूर भभुआं के खिलाड़ियों ने दिखाई शानदार प्रतिभा
पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह ने किया उद्घाटन
चंदौली जिले के शहाबगंज क्षेत्र के बड़गावां में मुहर्रम के चालीसवें दिन अंजुमन गरीब नवाज कमेटी की ओर से आयोजित चेहल्लूम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी भव्य रूप से संपन्न हुआ, जिसमें नसीरपुर और कैमूर भभुआं (बिहार) से आए खिलाड़ियों ने अपनी कला और प्रतिभा का लोहा मनवाया।
आपको बता दें कि प्रतियोगिता का उद्घाटन पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबली सिंह ने फीता काटकर और अखाड़े के उस्तादों को साफा बांधकर किया। उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि अखाड़ा केवल खेल का माध्यम नहीं बल्कि हमारी संस्कृति और भाईचारे की पहचान है। उन्होंने यह भी कहा कि नई पीढ़ी इस परंपरा को संजोए हुए है और युवाओं के करतब यह दर्शाते हैं कि यह खेल केवल ताकत नहीं बल्कि अनुशासन और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक भी है।
प्रधान संघ ब्लॉक अध्यक्ष गुलफाम अहमद मिक्कू ने बताया कि चेहल्लूम के अवसर पर अखाड़े का आयोजन वर्षों से चला आ रहा है। यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि गांव की पहचान और पीढ़ियों को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि युवाओं का उत्साह और ग्रामीणों की भागीदारी इसे और खास बनाती है।
कार्यक्रम के दौरान रविवार की रात को अंजुमन सदाए हक अहले सुन्नत कटेसर, अंजुमन गुलजारे पंजतन पाक डिग्घी और अंजुमन तस्नाए हुसैनी सोहदवार ने चौक पर नौहा खानी कर श्रद्धालुओं को अकीदत का अनुभव कराया। सोमवार को दिन में अंजुमन हैदरिया नसीरपुर पट्टन अलीनगर, अंजुमन गौसिया कमेटी केरायगांव और अंजुमन नूरी नौजवां सरैया कैमूर भभुआं की टीम ने लकड़ी, बनेठी, बंदिश, बाना और झूमर जैसे पारंपरिक औजारों से अपनी कला का प्रदर्शन किया।
इस कार्यक्रम को देखने के लिए गांव के साथ-साथ आसपास के कई गांवों के लोग भी बड़ी संख्या में पहुंचे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से पूर्व जिला पंचायत सदस्य डा. प्रदीप मौर्य, पूर्व प्रधान जमील अहमद, अध्यक्ष महताब अहमद, अल्तजा हुसैन, इबरार अली, राकिब, अनीज, हरिलाल, नसीब खां, सलाहुद्दीन, साबिर, आमिर और आकिब सहित अंजुमन के कई लोग उपस्थित रहे।
इस आयोजन ने साबित कर दिया कि चेहल्लूम केवल एक धार्मिक अवसर नहीं बल्कि पारंपरिक खेलों और सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का माध्यम भी है। युवाओं के उत्साह और कौशल ने इस कार्यक्रम को एक यादगार अनुभव बना दिया, जबकि ग्रामीणों और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इसे और भी भव्य बना दिया।