शहाबगंज के बेलावर में हैंडपंप रिबोर के नाम पर बड़ा खेल: 3 लाख डकारने वाले प्रधान के गांव में सूखे पड़े हैं हैंडपंप
चंदौली के पहाड़ी गांव बेलावर में हैंडपंप रिबोर के नाम पर ₹3 लाख से अधिक की धनराशि हड़पने का आरोप लगा है। ग्रामीणों का दावा है कि सरकारी रिकॉर्ड में काम पूरा दिखाकर भुगतान तो हो गया, लेकिन धरातल पर हैंडपंप आज भी खराब पड़े हैं।
बेलावर ग्राम पंचायत में ₹3.01 लाख का रिबोर घोटाला
कागजों पर रिबोर दिखाकर सरकारी धन की बंदरबांट
पहाड़ी क्षेत्र में पेयजल के लिए तरस रहे ग्रामीण
बीडीओ दिनेश सिंह ने मामले की जांच के दिए आदेश
ग्राम प्रधान और जिम्मेदारों पर फर्जी भुगतान का आरोप
उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण इलाकों में हर घर जल पहुंचाने का दावा कर रही है, लेकिन चंदौली के शहाबगंज विकासखंड स्थित बेलावर गांव से भ्रष्टाचार का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ पहाड़ी क्षेत्र के ग्रामीणों के लिए जीवनदायिनी माने जाने वाले हैंडपंपों के रिबोर के नाम पर ₹3,01,441 की सरकारी धनराशि तो निकाल ली गई, लेकिन धरातल पर हैंडपंप आज भी बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
कहा जा रहा है कि पहाड़ी इलाके में स्थित बेलावर गांव में पेयजल की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। गर्मी के मौसम में यह संकट और गंभीर हो जाता है। गांव में हैंडपंप ही ग्रामीणों के लिए पानी का मुख्य स्रोत हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि हैंडपंपों का सही तरीके से रिबोर कराया गया होता तो गांव में जल संकट काफी हद तक दूर हो सकता था, लेकिन कागजों में कार्य दिखाकर धनराशि निकाल लेने से समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार जिन हैंडपंपों का रिबोर कागजी अभिलेखों में दर्शाया गया है, उनमें से कई हैंडपंप आज भी पानी नहीं दे रहे हैं। कुछ हैंडपंप जर्जर हालत में पड़े हैं। इसके बावजूद सरकारी रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण दिखाकर भुगतान कर दिया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि यह पूरा मामला फर्जी रिपोर्ट और कागजी कार्रवाई के जरिए अंजाम दिया गया है।
गांव निवासी राजू ने बताया कि कई हैंडपंप महीनों से खराब हैं, लेकिन कागजों में रिबोर दिखाकर पैसा निकाल लिया गया। वहीं अलीम ने कहा कि यदि वास्तव में रिबोर कराया गया होता तो ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना नहीं पड़ता। त्रिभुवन का आरोप है कि गांव के लोग आज भी दूसरे मोहल्लों में जाकर पानी भरने को मजबूर हैं। अशोक ने बताया कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान पर बिना कार्य कराए धनराशि निकालने का आरोप लगाया है और कहा है कि यदि मौके पर जांच कराई जाए तो सच्चाई सामने आ सकती है। एक ओर सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं बेलावर जैसे पहाड़ी गांवों में लोग आज भी जल संकट से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, मुख्य विकास अधिकारी और खंड विकास अधिकारी से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
खंड विकास अधिकारी दिनेश सिंह ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आया है। शिकायत की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।