शहाबगंज के भटरौल गांव में मंचा हड़कंप: रोजगार सेवक ने पूर्व प्रधान के गबन की जिलाधिकारी से की शिकायत

 

चंदौली के भटरौल गांव में विकास कार्यों के नाम पर धांधली का मामला गरमाया है। रोजगार सेवक ने पूर्व प्रधान पर अपने पति की फर्म को नियम विरुद्ध भुगतान करने और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए जिलाधिकारी से जांच की मांग की है।

 
 

पूर्व प्रधान पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

पारिवारिक फर्म को किया गया अवैध भुगतान

वित्तीय वर्ष 2018-19 के कार्यों की जांच

रोजगार सेवक ने डीएम को सौंपा ज्ञापन

सरकारी राजस्व को भारी नुकसान का दावा

चंदौली जिले के विकास खंड शहाबगंज के अंतर्गत आने वाले ग्राम पंचायत भटरौल में सरकारी धनराशि के कथित बंदरबांट का एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। गांव के वर्तमान रोजगार सेवक शतीष कुमार चौहान ने पूर्व प्रधान के कार्यकाल के दौरान हुए कार्यों पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी कार्यालय में मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने एक लिखित ज्ञापन सौंपकर वित्तीय अनियमितताओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई है।

पारिवारिक फर्म को लाभ पहुँचाने का लगा गंभीर आरोप
रोजगार सेवक शतीष चौहान द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान तत्कालीन प्रधान पुष्पा सिंह ने सत्ता का दुरुपयोग करते हुए ग्राम पंचायत के विकास कार्यों का भुगतान किसी अन्य वैध फर्म को करने के बजाय अपने पति की निजी फर्म को किया। आरोप है कि सरकारी धन को व्यक्तिगत लाभ में बदलने के लिए नियमों को ताक पर रखकर यह पूरी प्रक्रिया अपनाई गई। शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कृत्य से सरकारी राजस्व को बड़ी क्षति पहुँची है।

बिना कार्य कराए भुगतान और मानकों की अनदेखी
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि कई विकास कार्य या तो धरातल पर हुए ही नहीं, या फिर मानकों की भारी अनदेखी की गई। बिना वास्तविक कार्य निष्पादन के ही पारिवारिक फर्म के नाम पर सरकारी बजट की निकासी कर ली गई। रोजगार सेवक ने इस पूरे प्रकरण को नियम विरुद्ध बताते हुए संबंधित अभिलेखों को खंगालने और दोषियों के विरुद्ध कठोर विधिक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

प्रशासनिक स्तर पर जांच की सुगबुगाहट
जिलाधिकारी कार्यालय में इस शिकायत के पहुंचने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल बढ़ गई है। माना जा रहा है कि प्रशासन जल्द ही इस मामले की जांच के लिए टीम गठित कर सकता है। वहीं, भटरौल गांव में इस आरोपों के बाद राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है और ग्रामीणों के बीच पारदर्शिता को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। रोजगार सेवक ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने के लिए निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।