"पंचशील के सिद्धांतों से ही समाज से खत्म होगी हिंसा", चकिया में बुद्ध धम्म देशना कथा के पहले दिन उमड़े श्रद्धालु
चंदौली के सैदूपुर में पांच दिवसीय संगीतमय सनातनी बुद्ध धम्म देशना कथा का भव्य आगाज हुआ। बोधगया से आईं प्रसिद्ध कथावाचिका भन्ते वंदना ने भगवान बुद्ध के त्रिशरण और पंचशील सिद्धांतों की व्याख्या कर श्रद्धालुओं को मानवता का मार्ग दिखाया।
सैदूपुर में बुद्ध धम्म देशना कथा शुरू
बोधगया की भन्ते वंदना ने दिया संदेश
त्रिशरण और पंचशील का बताया महत्व
दुखों से मुक्ति का मार्ग है करुणा
भक्ति गीतों पर भावविभोर हुए श्रद्धालु
चंदौली तहसील क्षेत्र चकिया के अंतर्गत बुद्ध विहार महामाया सरोवर सैदूपुर के तत्वावधान में पांच दिवसीय संगीतमय सनातनी बुद्ध धम्म देशना कथा का भव्य शुभारंभ हुआ। कथा के प्रथम दिन ही बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। इस धार्मिक आयोजन के पहले दिन बोधगया से पधारीं प्रख्यात कथावाचिका भन्ते वंदना ने उपस्थित जनसमुदाय को भगवान बुद्ध के त्रिशरण और पंचशील सिद्धांतों का विस्तारपूर्वक बोध कराते हुए धर्म और मानवता का सच्चा संदेश दिया।
त्रिशरण के माध्यम से मिलता है सदाचार का मार्ग
कथा मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए भन्ते वंदना ने कहा कि त्रिशरण का सीधा अर्थ बुद्ध, धम्म और संघ की शरण में खुद को समर्पित करना है। व्यक्ति जब सच्चे मन से 'बुद्धं शरणं गच्छामि, धम्मं शरणं गच्छामि और संघं शरणं गच्छामि' का संकल्प लेता है, तो वह स्वतः ही सत्य, अहिंसा और सदाचार के मार्ग पर अग्रसर हो जाता है। उन्होंने आगे कहा कि तथागत बुद्ध ने संपूर्ण मानव जीवन को सांसारिक दुखों से मुक्ति दिलाने के लिए करुणा, दया, प्रेम और आपसी भाईचारे का ही मार्ग दिखाया था।
पंचशील के सिद्धांतों से सुधरेगा आज का समाज
वर्तमान सामाजिक परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त करते हुए कथावाचिका ने पंचशील की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने कहा कि आज के समय में हर मनुष्य को जीव हत्या न करने, चोरी से दूर रहने, व्यभिचार न करने, असत्य भाषण से बचने तथा किसी भी प्रकार के नशे का सेवन न करने का कड़ा संकल्प लेना चाहिए। यही पांचशील सिद्धांत मानव जीवन को अनुशासित और शांतिपूर्ण बनाते हैं। आज समाज में जो हिंसा, चोरी, दुराचार और दुराचार जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं, उन्हें भगवान बुद्ध के विचारों और पंचशील को आत्मसात करके ही रोका जा सकता है।
बुद्ध वंदना से भावविभोर हुए बौद्ध अनुयायी
संगीतमय कथा के दौरान बीच-बीच में प्रस्तुत की गई बुद्ध वंदना और भक्ति गीतों को सुनकर वहां मौजूद सभी श्रद्धालु पूरी तरह से भावविभोर नजर आए। इस पावन अवसर पर मुख्य रूप से मनगोई बौद्ध, गौरीशंकर मौर्य, लालजी, नंदलाल, लोकपति मौर्य, रामअवतार मौर्य, जितेंद्र कुमार, नंदलाल शास्त्री सहित भारी संख्या में क्षेत्रीय बौद्ध अनुयायी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। यह पांच दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान क्षेत्र में शांति और नैतिक मूल्यों की स्थापना के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है।