चकिया में दलालों के जाल में फंसा परिवार: डिलीवरी के बाद 22 वर्षीय विनीता की मौत, अस्पताल स्टाफ शव छोड़कर भागा तो हो गया सील

 

चंदौली के चकिया में एक अवैध निजी अस्पताल की बड़ी लापरवाही के कारण प्रसूता की जान चली गई। रजिस्ट्रेशन खत्म होने के बावजूद बिना योग्य डॉक्टर के चल रहे इस अस्पताल को स्वास्थ्य विभाग ने अब तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है।

 
 

प्रसूता की मौत के बाद बड़ी कार्रवाई

अवैध रूप से संचालित अस्पताल हुआ सील

पिछले साल अप्रैल में खत्म हुआ रजिस्ट्रेशन

बिना योग्य डॉक्टर के चल रहा था इलाज

वाराणसी के अस्पताल में शव छोड़कर भागे

 चंदौली जिले के चकिया नगर स्थित बुद्ध नगर कॉलोनी से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक निजी अस्पताल में डिलीवरी के बाद एक 22 वर्षीय महिला विनीता पासवान की मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर इलाज में भारी लापरवाही बरतने के गंभीर आरोप लगाए और जमकर हंगामा किया। मामला तूल पकड़ते ही स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया और आनन-फानन में सोमवार को टीम भेजकर जांच कराई गई।

झांसे में लेकर दलाल लाए थे अस्पताल
मृतक महिला विनीता पासवान बिहार के कैमूर जिले के चांद थाना क्षेत्र स्थित लाहोपाकड़ गांव की रहने वाली थी। विनीता के पति दीपक पासवान ने बताया कि 6 जून को उनकी गर्भवती पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई, जिसके बाद वे उसे चकिया स्थित संयुक्त चिकित्सालय लेकर पहुंचे थे। आरोप है कि अस्पताल परिसर से ही एक निजी अस्पताल के दलाल ने उन्हें बेहतर इलाज का झांसा दिया और फुसलाकर बुद्ध नगर कॉलोनी के इस प्राइवेट अस्पताल में ले आया। अस्पताल वालों ने मोटी रकम लेकर महिला का ऑपरेशन किया, जिसके बाद उसने एक बच्ची को जन्म दिया।

अप्रशिक्षित स्टाफ ने लगाए इंजेक्शन तो  बिगड़ी हालत
परिजनों से मिली शिकायत के मुताबिक, ऑपरेशन के अगले दिन विनीता की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उस वक्त अस्पताल में कोई भी योग्य डॉक्टर मौजूद नहीं था। आरोप है कि वहां तैनात अप्रशिक्षित कंपाउंडर/स्टाफ ने बिना सोचे-समझे विनीता को कई इंजेक्शन लगा दिए। इसके बाद उसकी हालत और ज्यादा गंभीर हो गई और कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया। जब स्थिति पूरी तरह बिगड़ गई, तो अस्पताल के कर्मचारी घबरा गए और वे विनीता के शव को अपने वाहन से वाराणसी के एक निजी अस्पताल ले गए और वहां शव को छोड़कर फरार हो गए।

बिना रजिस्ट्रेशन और बिना डॉक्टरों के चल रहा था अस्पताल
घटना की सूचना मिलते ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी डॉ. विकास सिन्हा और नोडल अधिकारी डॉ. संजय सिंह के नेतृत्व में एक जांच टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। टीम ने पाया कि अस्पताल का पूर्व पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) पिछले वर्ष अप्रैल 2025 में ही समाप्त हो चुका था। इसके बावजूद अस्पताल संचालक ने दोबारा रजिस्ट्रेशन नहीं कराया था। 

कहा जा रहा है कि यह अस्पताल पूरी तरह बिना किसी वैध दस्तावेज और बिना किसी योग्य डॉक्टर के अवैध रूप से चलाया जा रहा था। अस्पताल संचालक कोई भी वैध कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल को सील कर दिया। कोतवाली प्रभारी अर्जुन सिंह ने बताया कि परिजनों की तहरीर के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।