लाखों खर्च फिर भी बदहाल: चंदौली के गांवों में कबाड़ बन रहे ओपन जिम, देखरेख के अभाव में जंग खा रहे जिम के उपकरण
चंदौली के चकिया विकासखंड में सरकारी धन की बर्बादी का बड़ा मामला सामने आया है। लाखों की लागत से बने ओपन जिम अब झाड़ियों और गंदगी के बीच खंडहर में तब्दील हो रहे हैं, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
चकिया के कई गांवों में ओपन जिम बदहाल
उपकरणों की गुणवत्ता और मजबूती पर सवाल
परिसर में फैली गंदगी और ऊंची झाड़ियां
सरकारी बजट की बंदरबांट का गंभीर आरोप
देखरेख के अभाव में उपकरण हुए जर्जर
चंदौली जिले के कई ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से शासन द्वारा लाखों रुपये की लागत से 'ओपन जिम' स्थापित किए गए थे। लेकिन चंदौली जनपद के चकिया विकासखंड में यह योजना अब केवल कागजी दावों और जंग लगे लोहे के ढांचों तक सिमट कर रह गई है। देखरेख के अभाव में ये ओपन जिम अब बदहाली का पर्याय बन चुके हैं। आप तस्वीरें देखकर सरकारी पैसे के उपयोग व उसके रखरखाव का अंदाजा लगा सकते हैं।
रखरखाव का अभाव में जंग खाते सामान
चकिया ब्लॉक के अंतर्गत रघुनाथपुर और शिकारगंज सहित कई गांवों में स्थापित इन जिमों की स्थिति वर्तमान में अत्यंत दयनीय है। जिस परिसर में लोग व्यायाम के लिए आने वाले थे, वहां अब ऊंची-ऊंची झाड़ियां उग आई हैं। चारों ओर फैली गंदगी और झाड़ियों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है, जिससे प्रशासन के रखरखाव के दावों की पोल खुल रही है। परिसर में सफाई की कोई व्यवस्था न होने के कारण स्थानीय लोगों ने अब यहाँ आना लगभग बंद कर दिया है।
उपकरणों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
जिम में लगे उपकरणों की स्थिति देखकर उनकी गुणवत्ता पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि उपकरणों के चयन और स्थापना में भारी अनियमितता बरती गई है। ग्रामीणों का तर्क है कि जहां निजी उपयोग के लोहे के औजार वर्षों तक पानी और कीचड़ के संपर्क में रहने के बावजूद सुरक्षित रहते हैं, वहीं सरकारी बजट से लगाए गए ये उपकरण कुछ ही महीनों में जंग खाकर टूटने लगे हैं। यह सीधे तौर पर घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग की ओर इशारा करता है।
जनता में भारी आक्रोश और प्रशासन की चुप्पी
लाखों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति के इस तरह नष्ट होने पर स्थानीय निवासियों में गहरा रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि इन जिमों के निर्माण के समय गुणवत्ता की निगरानी की गई होती और बाद में इनके रखरखाव की जिम्मेदारी तय होती, तो आज ये क्षेत्र के युवाओं के काम आ रहे होते। फिलहाल, ये ओपन जिम व्यायाम के केंद्र न रहकर केवल सरकारी धन की बर्बादी का स्मारक नजर आ रहे हैं। क्षेत्र की जनता ने जिला प्रशासन से इस मामले की जांच कराने और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग की है।