सोने के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी: चकिया पुलिस ने 12 घंटे में दबोचे 7 शातिर ठग, 15.80 लाख बरामद
चंदौली जिले के चकिया में पुलिस ने 16 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के 12 घंटे के भीतर ही 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर 15.80 लाख रुपये बरामद किए हैं।
चंदौली जिले की चकिया पुलिस को मिली बड़ी कामयाबी
16 लाख की ठगी करने वाला अंतरराज्यीय गिरोह अरेस्ट
सोने के नाम पर लाखों की धोखाधड़ी करने का खेल
चकिया पुलिस ने 12 घंटे में दबोचे 7 शातिर ठग
सारे ठगों के पासे से कुल 15.80 लाख हुए बरामद
चंदौली जनपद की चकिया पुलिस ने अपराध और अपराधियों के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। जनपद के थाना चकिया क्षेत्र में एक सुनियोजित तरीके से 16 लाख रुपये की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए पुलिस टीम ने 7 शातिर अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि पुलिस ने मुकदमा दर्ज होने के महज 12 घंटे के भीतर ही इस गिरोह को दबोच लिया। पुलिस की इस तत्परता की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।
क्या थी पूरी घटना?
मामला 23 अप्रैल 2026 का है, जब चकिया थाना क्षेत्र के ग्राम सभा बरहुवां स्थित 'शशि ज्वैलर्स' के संचालक शशि प्रकाश वर्मा के साथ एक संगठित गिरोह ने बड़ी चालाकी से धोखाधड़ी की। आरोपियों ने एक सोची-समझी साजिश के तहत पहले ज्वैलर का भरोसा जीता। उन्होंने शुरुआत में असली सोने के छोटे दाने बेचकर पीड़ित को विश्वास दिलाया कि वे विश्वसनीय व्यापारी हैं। जब ज्वैलर का भरोसा पूरी तरह जम गया, तो आरोपियों ने उन्हें 100 ग्राम से अधिक सोना देने का प्रलोभन दिया और बदले में 16 लाख रुपये की भारी रकम ऐंठ ली।
पैसे लेने के बाद, आरोपियों ने एक पोटली पीड़ित को थमा दी और वहां से फरार हो गए। जब शशि प्रकाश वर्मा ने पोटली खोली, तो उसमें सोने के स्थान पर नकली चमकदार गुरिया (धातु के टुकड़े) पाए गए। ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई और धारा 316(2), 318(4) बीएनएस के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई।
सर्विलांस और मुखबिर का सटीक जाल
पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर थाना प्रभारी चकिया, अर्जुन सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, सर्विलांस सेल की मदद और मुखबिरों से मिली सटीक सूचनाओं को जोड़कर काम करना शुरू किया। जांच की कड़ियों को जोड़ते हुए 26 अप्रैल की सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी। टीम ने ग्राम सभा बेलावर के पिछवाड़ी गांव की पहाड़ियों के पास घेराबंदी कर इन 7 शातिर ठगों को धर दबोचा। इनके कब्जे से ठगी किए गए कुल 15.80 लाख रुपये बरामद किए गए, जो कि पुलिस की एक बड़ी उपलब्धि है।
कौन है यह गिरोह और कैसे काम करता था?
पूछताछ के दौरान गिरोह ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए। गिरफ्तार अभियुक्तों ने बताया कि वे एक संगठित घुमंतू या खानाबदोश गिरोह के सदस्य हैं। वे अक्सर अपनी पहचान छिपाकर अलग-अलग क्षेत्रों में घूमते रहते हैं। खुद को उड़ीसा की सोने की खदानों का पूर्व कर्मचारी बताकर वे लोगों को आसानी से अपने जाल में फंसाते थे और मदारी या घुमंतू व्यापारी का वेश धरकर घूमते थे।
यह गिरोह बड़े ही मनोवैज्ञानिक तरीके से काम करता था। पहले वे छोटे स्तर पर असली सामान देकर लोगों का विश्वास जीतते थे, और फिर एक बार बड़ी रकम हाथ में आने के बाद नकली सामग्री थमाकर रफूचक्कर हो जाते थे। वारदात को अंजाम देने के बाद वे तुरंत अपना ठिकाना बदल लेते थे, ताकि पुलिस को उन तक पहुंचने में परेशानी हो। पुलिस अब इनके अन्य आपराधिक इतिहास को खंगाल रही है ताकि अन्य राज्यों में इनके द्वारा किए गए अपराधों का भी खुलासा हो सके।
गिरफ्तार अभियुक्तों का विवरण
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में उड़ीसा के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग शामिल हैं:---
- गोविन्द प्रधान (वेटरा, भदरक)
- विष्णु प्रधान (वेटरा, भदरक)
- दुखबन्धु पटरा (जजापुर, उड़ीसा)
- सन्तोषी प्रधान (पत्नी तपन प्रधान, जजापुर)
- कंचन प्रधान (पत्नी विष्णु प्रधान, भदरक)
- सन्तोषी प्रधान (पत्नी पुरूषोत्तम प्रधान, जजापुर)
- बोधई प्रधान (कोलिंग नगर, जजापुर)
इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में थाना प्रभारी चकिया अर्जुन सिंह, सर्विलांस प्रभारी आशीष मिश्रा, उपनिरीक्षक अनिल कुमार पाण्डेय, हरेंद्र कुमार यादव, महिला उप निरीक्षक ख़ुशबू यादव तथा हेड कांस्टेबल प्रेम प्रकाश यादव सहित सर्विलांस सेल और थाना चकिया की पूरी टीम शामिल थी। उनकी इस मेहनत और तकनीकी दक्षता के कारण ही एक अंतरराज्यीय गिरोह का अंत हो पाया। पुलिस प्रशासन ने जनता से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के प्रलोभन में न आएं और कीमती धातुओं के लेन-देन में पूरी सावधानी बरतें। इस गिरफ्तारी ने यह संदेश दिया है कि अपराध करके कानून की नजरों से बचकर निकलना नामुमकिन है।