ओवरलोडेड ट्रेलर का कहर, गुमटी में टक्कर से वृद्ध दुकानदार की मौत, ग्रामीणों ने किया चक्का  जाम 

 

चंदौली के चकिया-अहरौरा मार्ग पर ओवरलोडेड ट्रेलर ने गुमटी में टक्कर मारी। हादसे में 65 वर्षीय दुकानदार बाढ़ू चौहान की नहर में गिरने से मौत, ग्रामीणों में आक्रोश।

 
 

चकिया में ओवरलोडेड ट्रेलर का कहर

 गुमटी में टक्कर से वृद्ध की मौत

 उचेहरा गांव के पास हुआ हादसा

 प्रतिबंधित मार्ग पर दौड़ रहे भारी वाहन

 पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 चंदौली जिले के चकिया कोतवाली क्षेत्र में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हो गया। चकिया-अहरौरा मार्ग पर उचेहरा गांव के पास एक ओवरलोडेड ट्रेलर ने सड़क किनारे लगी गुमटी में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के समय गुमटी में 65 साल के वृद्ध दुकानदार बाढ़ू चौहान मौजूद थे। टक्कर के बाद वे नहर में गिर गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस घटना से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही चकिया कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। हादसे से गुस्साए ग्रामीणों ने घटनास्थल पर शव रखकर चक्का जाम कर दिया और कार्रवाई की मांग करने लगे।

प्रतिबंधित मार्ग पर बेरोकटोक दौड़ रहे ट्रेलर

इस हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहनों के चलने को लेकर उठ रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि चकिया-अहरौरा मार्ग प्रतिबंधित होने के बावजूद यहां सुबह से लेकर देर रात तक ओवरलोडेड ट्रेलर बेरोकटोक दौड़ते हैं।

ये ट्रेलर अहरौरा और सोनभद्र की पहाड़ियों से गिट्टी भरकर आते हैं और अहरौरा-चकिया और चकिया-इलिया मार्ग से होकर गुजरते हैं। ओवरलोड होने की वजह से इनकी रफ्तार पर कंट्रोल नहीं रहता और आए दिन हादसे का खतरा बना रहता है। इससे पैदल चलने वाले लोगों, बाइक सवारों और सड़क किनारे दुकान लगाने वालों की जान हमेशा खतरे में रहती है।

एक साल से मांग, फिर भी कोई सुनवाई नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले एक साल से लगातार इस प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहनों को रोकने की मांग कर रहे हैं। कई बार पुलिस और प्रशासन को लिखित शिकायत भी दी गई है। लेकिन समस्या कम होने की बजाय और बढ़ती जा रही है।

लोगों का सवाल है कि जब यह मार्ग भारी वाहनों के लिए बंद है तो फिर ट्रेलर यहां से कैसे गुजर रहे हैं? जिम्मेदार विभाग आखिर कार्रवाई क्यों नहीं कर रहा है? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा था?

पुलिस की भूमिका पर गंभीर सवाल

लगातार ओवरलोडेड वाहनों के चलने से पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि कथित मिलीभगत के कारण इन वाहनों पर रोक नहीं लग पा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन परिवहन नियमों की खुलेआम अनदेखी हो रही है।

लोगों का कहना है कि कार्रवाई न होने से ट्रेलर मालिकों के हौसले बढ़ गए हैं और वे बेखौफ होकर ओवरलोड गाड़ियां चला रहे हैं।

आखिर कब जागेंगे जिम्मेदार?

उचेहरा गांव में हुई इस घटना ने सड़क सुरक्षा की पूरी पोल खोल दी है। एक गरीब वृद्ध दुकानदार की जान चली गई, जो अपनी गुमटी पर बैठकर परिवार का पेट पाल रहा था। अब स्थानीय लोगों ने मांग की है कि मृतक के परिवार को मुआवजा दिया जाए, प्रतिबंधित मार्ग पर ओवरलोड वाहनों की आवाजाही तुरंत रोकी जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो।

अब देखना होगा कि इस हादसे के बाद पुलिस और परिवहन विभाग कोई ठोस कदम उठाते हैं या फिर पहले की तरह ही भारी वाहन इस मार्ग पर दौड़ते रहेंगे।