चकिया में गूंजे ठहाके: पूर्वांचल फाउंडेशन के 10 साल पूरे होने पर अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन का भव्य आयोजन

चकिया के आदित्य पुस्तकालय में मंगलवार की शाम हास्य और व्यंग्य के नाम रही। पूर्वांचल पोस्ट फाउंडेशन की 10वीं वर्षगांठ पर आयोजित कवि सम्मेलन में नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को देर रात तक मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

पूर्वांचल पोस्ट फाउंडेशन की 10वीं वर्षगांठ

अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन

चकिया विधायक कैलाश खरवार की उपस्थिति

देर रात तक गूंजे हास्य के ठहाके

साहित्य और व्यंग्य का अद्भुत संगम

चंदौली जनपद के चकिया नगर स्थित आदित्य पुस्तकालय परिसर में मंगलवार की शाम साहित्य और हास्य के नाम रही। अवसर था 'पूर्वांचल पोस्ट फाउंडेशन' की 10वीं वर्षगांठ का, जिसे एक भव्य अखिल भारतीय हास्य कवि सम्मेलन के रूप में मनाया गया। इस कार्यक्रम में हास्य, व्यंग्य और मर्मस्पर्शी कविताओं का ऐसा अनूठा संगम देखने को मिला कि स्थानीय श्रोता मंत्रमुग्ध होकर देर रात तक ठहाके लगाते रहे।

भव्य शुभारंभ और अतिथियों का स्वागत
कार्यक्रम का विधिवत आगाज़ मुख्य अतिथि चकिया विधायक कैलाश खरवार और पावर ग्रिड ऑफ इंडिया के स्वतंत्र निदेशक व पूर्व विधायक शिव तपस्या पासवान ने दीप प्रज्वलन कर किया। इस दौरान काशी विद्यापीठ के पत्रकारिता संस्थान के निदेशक डॉ. नागेंद्र सिंह, पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट और ब्लॉक प्रमुख शंभूनाथ यादव भी मौजूद रहे। आयोजन समिति के अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए फाउंडेशन के 10 वर्षों के सफर को साझा किया।

काव्य संध्या की शुरुआत होते ही मंच पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ। कवयित्री मणिका दुबे ने अपनी मार्मिक पंक्तियों—
“शहर के शोर में बिरानियां हैं, यहां तुम हो मगर तन्हाईयां हैं”
से श्रोताओं को भावुक कर दिया।


बाराबंकी से आए इंस्पेक्टर एवं कवि धर्मराज उपाध्याय ने अपनी तीखी सामाजिक व्यंग्य रचना—
“मुझे न तीर न तलवार की जरूरत है, सच कहने को बस अखबार की जरूरत है”
सुनाकर खूब वाहवाही लूटी।
प्रयागराज के हास्य कवि अखिलेश द्विवेदी ने अपने चुटीले अंदाज में कहा—
“हम अपना दर्द बांटें या न बांटें, पर हंसी जरूर बांटें”
जिस पर पूरा पंडाल ठहाकों से गूंज उठा।
गाजियाबाद की चर्चित कवयित्री डॉ. शिखा दीप्ति दीक्षित ने अपनी ओजपूर्ण प्रस्तुति—
“समझकर सार जीवन का मैं गीता बनकर निकलूंगी, समर्पण कर स्वयं का मैं विनीता बनकर निकलूंगी”
से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्थानीय कवि डॉ. मनोज द्विवेदी ‘मधुर’ ने अपनी भक्ति रस से ओतप्रोत रचना—
“मेरे ईश्वर मेरा मन ही तुम्हारा धाम हो जाए, मेरे जीवन का क्षण-प्रतिक्षण तुम्हारे नाम हो जाए”
सुनाकर कार्यक्रम को आध्यात्मिक ऊंचाई प्रदान की।

इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। सिकंदरपुर ग्राम प्रधान सीमा गुप्ता, उतरौत ग्राम प्रधान कंचन मौर्य, यूपीएससी में 726वीं रैंक प्राप्त करने वाले मृत्युंजय गुप्ता के पिता शिक्षक शैलेश गुप्ता, वरिष्ठ पत्रकार शीतला प्रसाद राय, रामचंद्र प्रसाद जायसवाल, चकिया की प्रभारी निरीक्षक अर्जुन सिंह एवं गोल्ड मेडलिस्ट नलिनी गोंड को मंच पर सम्मानित किया गया।

इसके साथ ही आयोजक प्रशांत कुमार गुप्ता ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों को स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया, जिससे आयोजन की गरिमा और बढ़ गई।

वहीं, “नारी शक्ति सम्मान” के तहत समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाली महिलाओं को विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस क्रम में वरिष्ठ समाजसेवी डॉ. गीता शुक्ला, भाजपा महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष सुषमा जायसवाल, भाजपा नेत्री दिव्या जायसवाल, सभासद ज्योति गुप्ता, मीना विश्वकर्मा, आरती जायसवाल सहित दर्जनों महिलाओं को अंगवस्त्र एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान उपस्थित लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से महिलाओं का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक कैलाश खरवार ने कहा कि ऐसे आयोजनों से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और युवा पीढ़ी को अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है। वहीं शिव तपस्या पासवान ने साहित्य को समाज को जोड़ने वाला सशक्त माध्यम बताया।

कार्यक्रम में भाजपा जिला अध्यक्ष काशीनाथ सिंह, चेतन मौर्य, डीपीआरओ नीरज सिंह, डीपीसी मनोज श्रीवास्तव, डॉ. विवेक प्रताप सिंह, प्रभात जायसवाल, टोनी खरवार, कैलाश प्रसाद जायसवाल, मनीष जायसवाल, महेंद्र राव, संदीप गुप्ता ‘आशु’, विकास खरवार, जीएस गुप्ता, प्रशांत कुमार, कार्तिकेय पाण्डेय, आशीष कुमार, विशाल कुमार, मुस्ताक अहमद, अमरदीप गुप्ता सहित सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन एवं आयोजन पूर्वांचल पोस्ट फाउंडेशन की टीम द्वारा किया गया, जिसने एक बार फिर चकिया की सांस्कृतिक धरोहर को सजीव करने का कार्य किया।