डुमरी गांव में CRPF शहीद दिलीप कुमार चौहान की प्रतिमा का अनावरण, 'दिलीप अमर रहे' के नारों से गूंजा पूरा क्षेत्र
शहीद दिलीप कुमार चौहान की प्रतिमा का अनावरण
विधायक कैलाश आचार्य ने किया मूर्ति का अनावरण
नक्सली हमले के शहीद दिलीप चौहान को श्रद्धांजलि
'दिलीप अमर रहे' के नारों से गूंजा पूरा क्षेत्र
युवाओं से प्रेरणा लेने का किया आह्वान
चंदौली जिले के शहाबगंज में शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति की भावना से भरा एक भावुक और प्रेरणादायक माहौल गुरुवार को क्षेत्र के डुमरी गांव में देखने को मिला, जब सीआरपीएफ के शहीद दिलीप कुमार चौहान की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया। हजारों की संख्या में उमड़े जनसैलाब और 'दिलीप अमर रहे' के नारों से पूरा गांव गूंज उठा।
प्रतिमा अनावरण समारोह में स्थानीय विधायक कैलाश आचार्य ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया और पूरे सम्मान के साथ वीर सपूत की प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, ग्रामीणों और शहीद के परिजनों ने पुष्प अर्पित कर वीर सपूत को श्रद्धांजलि दी।
विधायक ने दी श्रद्धांजलि, कहा- यह प्रतिमा साहस का प्रतीक
अनावरण के उपरांत, क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि शहीद दिलीप चौहान जैसे बहादुर जवानों के कारण ही हमारा देश और इसकी सीमाएं सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा, "ऐसे जवान कठिन से कठिन परिस्थितियों में राष्ट्र की रक्षा करते हैं और अपने प्राणों की आहुति देकर भी देश को सुरक्षित रखते हैं।"
विधायक ने डुमरी गांव के लोगों की हृदय से प्रशंसा की, जिन्होंने अपने इस वीर बेटे के सम्मान के लिए एक सुंदर और प्रेरणादायक प्रतिमा स्थापित की है। उन्होंने कहा कि यह प्रतिमा अब केवल एक मूर्ति नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन, त्याग और देशभक्ति की प्रतिमा है।
विधायक आचार्य ने जोर देकर कहा कि आज हम सबका यह कर्तव्य है कि हम उनके परिवार का सम्मान करें, उनकी शहादत को हमेशा याद रखें और उनके आदर्शों को युवा पीढ़ी तक पहुंचाएँ। उन्होंने आश्वस्त किया कि सरकार शहीद परिवारों के साथ हर कदम पर खड़ी है, और वह व्यक्तिगत रूप से भी हर संभव सहायता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे शहीद के जीवन से प्रेरणा लेकर देश, समाज और परिवार के प्रति अपने उत्तरदायित्वों को निभाएँ।
शहादत की कहानी: बीजापुर नक्सली हमला 2013
गौरतलब है कि वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में हुए एक नक्सली हमले में जवान दिलीप चौहान शहीद हो गए थे। वे उस समय नक्सल प्रभावित क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे थे। हमले के दौरान दिलीप चौहान ने अपनी टीम के साथ अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय देते हुए अंतिम क्षण तक मुकाबला किया और देश की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
दिलीप चौहान की शहादत की खबर ने तब पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया था, लेकिन उनके पराक्रम और राष्ट्र के प्रति समर्पण ने क्षेत्र के लोगों को गर्व से भर दिया। उनके बलिदान को अमर बनाने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने लंबे समय से प्रतिमा स्थापना की मांग की थी, जो आज साकार हुई।
जनसैलाब उमड़ा, गांव में भंडारे का आयोजन
मूर्ति अनावरण कार्यक्रम में सुबह से ही युवाओं, महिलाओं और बच्चों का प्रतिमा स्थल की ओर आना शुरू हो गया था। आस-पास के गांवों से भी सैकड़ों लोग शहीद को नमन करने पहुंचे। गांव के हर घर से लोग तिरंगा लेकर निकले और स्थानीय युवाओं ने बाइक रैली निकालकर शहीद को श्रद्धांजलि दी। शहीद के सम्मान में ग्रामीणों ने भंडारे का आयोजन भी किया, जिसमें सैकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
कार्यक्रम के दौरान शहीद के भाई चंद्रदेव चौहान, रजिंदर चौहान, पत्नी मंजू चौहान और परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे। प्रतिमा के अनावरण के क्षण पूरा परिवार भावुक हो उठा। कार्यक्रम संचालक रामकृष्ण पांडेय ने जब शहीद की जीवन यात्रा और उनके साहसिक कार्यों का उल्लेख किया तो सभी की आंखें नम हो गईं।
शहीद के भाइयों ने कहा कि गांव का यह प्यार और सम्मान उनके बलिदान को हमेशा अमर रखेगा। इस अवसर पर सीआरपीएफ के अधिकारी दिनेश तिवारी, भाजपा मंडल अध्यक्ष रिंकू विश्वकर्मा, पूर्व प्रधान पीएन सिंह, प्रधान संतोष गोंड़ सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन राम प्रकाश पांडेय ने किया।