काले कृषि कानूनों की वापसी की 5वीं वर्षगांठ पर  किसान विकास मंच ने आयोजित की किसान गोष्ठी

चंदौली के केरायगांव में किसान विकास मंच ने किसान आंदोलन की जीत की पांचवीं वर्षगांठ मनाई। इस दौरान वक्ताओं ने एमएसपी गारंटी कानून न बनाने और बाढ़ मुआवजे की अनदेखी पर सरकार को किसान विरोधी करार दिया।
 


चंदौली में किसान विकास मंच की मांग


सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर उठाए सवाल


सरकार पर वादे तोड़ने का लगाया आरोप


बहुराष्ट्रीय कंपनियों को बढ़ावा देने का भी लगाया आरोप

चंदौली जिला के शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत केरायगांव में तीन काले कृषि कानूनों के खिलाफ चले गौरवशाली एवं ऐतिहासिक किसान आंदोलन की जीत की पांचवीं वर्षगांठ पर किसान विकास मंच के तत्वावधान में किसान गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में किसान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों को किसान-मजदूर विरोधी बताते हुए जमकर निशाना साधा।

 किसान विकास मंच के अध्यक्ष राधेश्याम पांडेय ने कहा कि सरकार ने कृषि कानून वापस लेते समय एमएसपी गारंटी कानून लाने का वादा किया था, लेकिन आज तक उसे लागू नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जो सरकार किसानों को उनके उत्पाद का न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित नहीं कर सकती, वह किसान हितैषी कैसे हो सकती है। यह किसानों के लिए बड़े संकट का संकेत है।

 प्रमुख विचारक श्याम बिहारी सिंह ने कहा कि कोरोना महामारी के दौरान ही सरकार ने काले कृषि कानूनों और मजदूरों के खिलाफ चार लेबर कोड पास कर दिए, जो किसानों और मजदूरों को विदेशी व देसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हवाले करने की साजिश थी। उन्होंने इसे अमेरिका समर्थित आर्थिक नीतियों की साजिश बताते हुए कहा कि यह कानून भारत की संप्रभुता पर बड़ा हमला थे।
 संगठन मंत्री राम अवध सिंह ने कहा कि अगर कृषि कानून वापस न होते तो किसानों की खेती और जमीन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कब्जे में चली जाती।

 उन्होंने कहा कि चंदौली की धरती पर किसान विकास मंच ने आंदोलन में सबसे अधिक योगदान दिया। सरकार पर आरोप लगाया कि बाढ़ और मोंथा तूफान में फसल बर्बादी के बाद भी किसानों को उचित मुआवजा नहीं मिला। कुछ क्षेत्रों में 4,000 रुपये प्रति बीघा देकर सरकार ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया, जबकि संगठन ने 30,000 रुपये प्रति एकड़ मुआवजे की मांग की थी, जो आज तक लंबित है। 

वक्ताओं ने किसानों से जागरूक रहने की अपील करते हुए कहा कि अगर किसान अपने अधिकारों के लिए खड़ा नहीं होगा, तो देश की खेत और खेती दोनों बहुराष्ट्रीय कंपनियों के कब्जे में चली जाएंगी।

इस अवसर पर उपेंद्र सिंह, धीरेंद्र सिंह, राधेश्याम सिंह, नरेंद्र सिंह, रमेश पांडेय, बृजेश विश्वकर्मा सहित तमाम किसान उपस्थित रहे। अध्यक्षता रामनिवास पांडेय ने संचालन रामअवध सिंह ने किया।