वंचितों के मसीहा थे डॉ. भीमराव अंबेडकर: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्थल पर जुटे दिग्गज, सामाजिक न्याय का लिया संकल्प
अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर शहाबगंज में आयोजित विचार गोष्ठी में वक्ताओं ने डॉ. भीमराव अंबेडकर को आधुनिक भारत का निर्माता बताया। गोष्ठी में उनके सामाजिक न्याय, महिला अधिकार और आर्थिक नीतियों के योगदान पर विस्तृत चर्चा की गई।
अंबेडकर जयंती की पूर्व संध्या पर भव्य विचार गोष्ठी
आधुनिक भारत के निर्माण में बाबा साहब का योगदान
वंचितों और महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष
शहाबगंज ब्लॉक मुख्यालय पर जुटीं कई राजनीतिक हस्तियाँ
समानता और बंधुत्व के सिद्धांतों को बढ़ाने का संकल्प
बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती की पूर्व संध्या पर सोमवार को शहाबगंज ब्लॉक मुख्यालय स्थित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्थल पर एक गरिमामयी विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गोष्ठी में विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने आधुनिक भारत के निर्माण में बाबा साहब के अतुलनीय योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
सामाजिक न्याय और वंचितों की आवाज़
गोष्ठी को संबोधित करते हुए पूर्व सपा विधानसभा अध्यक्ष सुरेंद्र चौहान ने कहा कि डॉ. अंबेडकर केवल एक संविधान निर्माता नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय के सबसे बड़े प्रतीक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन उन 90 प्रतिशत लोगों की आवाज़ बनने में लगा दिया, जिन्हें सदियों से हाशिये पर रखा गया था। आईपीएफ प्रवक्ता अजय राय ने उनके आर्थिक विजन पर चर्चा करते हुए कहा कि कोलंबिया विश्वविद्यालय और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षित बाबा साहब ने भारत की आर्थिक नीतियों को जो दिशा दी, वह आज भी प्रासंगिक है।
महिला अधिकार और संवैधानिक सुरक्षा
देवानंद महर्षि ने डॉ. अंबेडकर के महिला सशक्तिकरण के प्रयासों को याद करते हुए कहा कि हिंदू कोड बिल के माध्यम से उन्होंने महिलाओं को संपत्ति और विवाह संबंधी अधिकार दिलाए। वहीं, जनवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष साहब सिंह फौजी ने भारतीय संविधान के निर्माण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका को रेखांकित किया। वक्ताओं ने उनके द्वारा 1956 में बौद्ध धर्म अपनाने को व्यक्तिगत निर्णय के बजाय एक महान सामाजिक आंदोलन की शुरुआत बताया, जिसने लाखों लोगों को आत्मसम्मान के साथ जीने की राह दिखाई।
आज के दौर में विचारों की प्रासंगिकता
सुरेंद्र मोदनवाल और निरंजन शर्मा ने कहा कि आज के चुनौतीपूर्ण समय में बाबा साहब के विचार और भी अधिक प्रासंगिक हो गए हैं। उनका जीवन हमें सिखाता है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा और दृढ़ संकल्प के बल पर व्यवस्था बदली जा सकती है। कार्यक्रम का संचालन रतीश कुमार ने किया। इस अवसर पर प्रमुख प्रतिनिधि राकेश सिंह, अंबेडकर सेवा समिति के अध्यक्ष बाबूलाल भास्कर, मिथिलेश कुमार, अभिषेक वर्मा सहित भारी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में बाबा साहब की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।