मसोई में गूँजा शिव महापुराण: कुसंगति त्यागकर कैसे कुबेर बने गुणनिधि, कथा सुन भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
शहाबगंज के मसोई गांव में आयोजित सात दिवसीय शिव महापुराण कथा के तीसरे दिन उमड़ा जनसैलाब। कथावाचक शिवम शुक्ला महाराज ने गुणनिधि के कुबेर बनने और दीपदान की महिमा का मार्मिक प्रसंग सुनाकर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मसोई गांव में शिव महापुराण कथा
गुणनिधि से कुबेर बनने का प्रसंग
दीपदान से मिला अलकापुरी का राज
कथावाचक शिवम शुक्ला की अमृत वाणी
चंदौली जनपद के शहाबगंज विकास खंड अंतर्गत मसोई गांव में आयोजित सात दिवसीय 'श्री शिव महापुराण' कथा के तीसरे दिन भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के तृतीय दिवस पर सुप्रसिद्ध कथावाचक श्री शिवम शुक्ला जी महाराज ने अपनी ओजस्वी वाणी से श्रद्धालुओं को शिव भक्ति के विभिन्न प्रेरणादायक प्रसंगों से सराबोर कर दिया। पंडाल में मौजूद सैकड़ों भक्तों ने पूरी तन्मयता के साथ कथा का श्रवण किया।
कुसंगति से शिव भक्ति तक का सफर
कथा के दौरान महाराज जी ने ‘गुणनिधि से कुबेर’ बनने का अत्यंत मार्मिक और शिक्षाप्रद प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार कुसंगति में पड़ा एक व्यक्ति भी यदि अनजाने में ही सही, भगवान शिव की शरण में आता है, तो उसका उद्धार निश्चित है। प्रसंग के अनुसार, विद्वान ब्राह्मण यज्ञदत्त का पुत्र गुणनिधि जुआ और मद्यपान जैसी बुरी आदतों का शिकार होकर घर की संपत्ति हार बैठा था। पिता द्वारा त्यागे जाने के बाद जब वह भूख-प्यास से व्याकुल होकर एक शिवालय पहुँचा, तो वहाँ घटित एक छोटी सी घटना ने उसका पूरा भविष्य बदल दिया।
दीपदान की अपार महिमा
शिवम शुक्ला महाराज ने दीपदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि रात्रि के समय गुणनिधि ने मंदिर में बुझते हुए दीपक को जलते रहने देने के लिए अपने वस्त्र का टुकड़ा फाड़कर उसकी बत्ती बनाई। हालांकि, इसके तुरंत बाद उसकी मृत्यु हो गई, लेकिन अनजाने में किए गए 'शिव भोग' ग्रहण और 'दीपदान' के पुण्य ने उसे यमराज के दंड से बचा लिया। इसी पुण्य के प्रताप से वह अगले जन्म में कलिंग देश का राजा दंभ बना और कालांतर में भगवान शिव की अनन्य कृपा से अलकापुरी के अधिपति और देवताओं के कोषाध्यक्ष 'कुबेर' के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।
भक्ति भाव में डूबा मसोई गांव
कथावाचक ने श्रद्धालुओं को संदेश दिया कि मनुष्य को कभी भी अपनी परिस्थितियों से हार नहीं माननी चाहिए। भगवान शिव की भक्ति में वह शक्ति है जो एक साधारण व्यक्ति को भी उच्चतम स्थान दिला सकती है। कथा के समापन पर भव्य आरती का आयोजन किया गया, जिसमें मसोई और आसपास के गांवों से आए पुरुष, महिला व बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाए। पूरा क्षेत्र 'हर-हर महादेव' के उद्घोष से गुंजायमान रहा। कथा के दौरान आयोजन समिति के सदस्य और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।