नशा मुक्ति अभियान: वाराणसी-चंदौली में गूँजा नारा— 'नशा नाश का दूजा नाम, तन-मन-धन तीनों बेकाम', युवाओं को किया जागरूक

 

वाराणसी और चंदौली में मद्यनिषेध विभाग द्वारा व्यापक नशामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। उप क्षेत्रीय अधिकारी राकेश रोशन ने युवाओं को नशे के घातक परिणामों के प्रति आगाह करते हुए स्वस्थ और नशामुक्त समाज बनाने का संकल्प दिलाया।

 
 

तन-मन-धन को खोखला करता नशा

वाराणसी-चंदौली में मद्यनिषेध जागरूकता अभियान

युवाओं में बढ़ती लत पर चिंता

नशे से बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं और अपराध

आर्थिक बचत और सुखद पारिवारिक जीवन

नशा नाश का दूजा नाम, तन-मन-धन तीनों बेकाम"—यह केवल एक नारा नहीं, बल्कि समाज के अस्तित्व को बचाने वाली एक गंभीर चेतावनी है। उप क्षेत्रीय मद्यनिषेध एवं समाजोत्थान अधिकारी राकेश रोशन ने वाराणसी और चंदौली जनपद में संचालित व्यापक नशामुक्ति अभियान के दौरान युवाओं और अभिभावकों को संबोधित करते हुए यह आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नशा एक ऐसी दीमक है जो व्यक्ति को भीतर से खोखला कर देती है।

सांस्कृतिक नगरी में नशे की बढ़ती चुनौती
वाराणसी और चंदौली जैसे आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व वाले क्षेत्रों में नशे का बढ़ता चलन चिंताजनक है। अधिकारी राकेश रोशन ने बताया कि युवाओं में तंबाकू, गुटखा, शराब और अन्य नशीले पदार्थों के प्रति बढ़ता आकर्षण समाज के भविष्य के लिए खतरा है। विद्यालयों और महाविद्यालयों में चलाए जा रहे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया जा रहा है कि शौक में शुरू की गई एक सिगरेट या शराब का एक पैग कब जानलेवा लत बन जाता है, इसका पता भी नहीं चलता।

नशे के दुष्परिणाम: दुर्घटनाएं और अपराध
अभियान के दौरान यह रेखांकित किया गया कि नशे के कारण न केवल स्वास्थ्य बिगड़ता है, बल्कि समाज में अपराध और सड़क दुर्घटनाओं का ग्राफ भी बढ़ता है। शराब पीकर वाहन चलाना खुद चालक और सड़क पर चल रहे मासूमों के लिए जानलेवा साबित होता है। इसके अलावा, नशे की लत को पूरा करने के लिए युवा अक्सर छोटे-मोटे अपराधों की ओर भी प्रवृत्त हो जाते हैं, जो उनके करियर और जीवन को अंधकारमय बना देता है।

मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक चोट
राकेश रोशन ने मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि नशा अवसाद (डिप्रेशन) और मानसिक अस्थिरता का मुख्य कारण है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों पर नजर रखें और उनके साथ मित्रवत संवाद बनाए रखें। वहीं, आर्थिक पक्ष को समझाते हुए उन्होंने बताया कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन ₹100 नशे पर खर्च करता है, तो साल भर में यह ₹36,000 से अधिक की राशि होती है, जिसका उपयोग बच्चों की शिक्षा या स्वास्थ्य में किया जा सकता है।

समाज निर्माण की ओर ठोस कदम
मद्यनिषेध विभाग द्वारा नुक्कड़ नाटक, रैलियां और पोस्टर प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में अलख जगाई जा रही है। युवाओं को खेलकूद और कौशल विकास जैसी सकारात्मक गतिविधियों से जोड़कर उन्हें रचनात्मक दिशा देने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों को 'नशामुक्त भारत' की शपथ दिलाई गई और एक सशक्त, सुरक्षित और स्वस्थ भविष्य की नींव रखने का संकल्प लिया गया।