सत्याग्रह रोकने पहुंची पुलिस तो माले नेता ने घर को ही बनाया आंदोलन का अड्डा: गरीबों की मांगों को लेकर कार्यकर्ताओं संग बैठे अनशन पर

 

शहाबगंज ब्लॉक मुख्यालय पर अनशन करने जा रहे भाकपा माले नेता अनिल पासवान को पुलिस ने उनके घर पर हाउस अरेस्ट कर लिया। इसके विरोध में उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं संग अपने घर के दरवाजे पर ही 24 घंटे का अनशन सत्याग्रह शुरू कर दिया।

 
 

भाकपा माले नेता अनिल पासवान हुए हाउस अरेस्ट

घर के दरवाजे पर ही शुरू किया अनशन सत्याग्रह

729 रुपये दैनिक मजदूरी और मुफ्त बिजली की मांग

गरीबों के 2 लाख तक कर्ज माफी की उठाई आवाज

पुलिसिया कार्रवाई के बावजूद एकजुट हुए कार्यकर्ता

चंदौली जिले में भाकपा (माले) और अखिल भारतीय खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा (खेग्रामस) के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर शहाबगंज ब्लॉक मुख्यालय पर गुरुवार को 24 घंटे का अनशन सत्याग्रह प्रस्तावित था। इस कार्यक्रम में शामिल होने जा रहे भाकपा (माले) के जिला सचिव व खेग्रामस के प्रदेश सह सचिव अनिल पासवान को पुलिस ने उनके घर पर ही हाउस अरेस्ट कर लिया। हालांकि, पुलिस की इस रोक-टोक के बावजूद आंदोलन रुका नहीं और कार्यकर्ताओं ने अनिल पासवान के घर पर ही डेरा डाल दिया।

पुलिस कार्रवाई के विरोध में घर पर ही शुरू हुआ सत्याग्रह
चकिया कोतवाली क्षेत्र के उसरी गांव स्थित अनिल पासवान के आवास पर पुलिस ने उन्हें बाहर जाने से रोक दिया। जैसे ही कार्यकर्ताओं को उनके हाउस अरेस्ट होने की जानकारी मिली, वे बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचने लगे। इसके बाद अनिल पासवान ने आंदोलन की राह पर बढ़ते हुए अपने घर के दरवाजे पर ही समर्थकों के साथ 24 घंटे का अनशन सत्याग्रह शुरू कर दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मजदूरी, आवास और कर्ज माफी समेत कई मांगें उठाईं
आंदोलनकारियों ने सरकार के सामने ग्रामीण गरीबों और मजदूरों से जुड़ी कई अहम मांगें रखीं। इनमें विकसित भारत जी-रामजी के तहत सालभर काम देने, 729 रुपये दैनिक मजदूरी तय करने, बेघरों को पांच डिसमिल जमीन व आवास देने, 6,000 रुपये मासिक पेंशन, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और बिजली के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग शामिल है। इसके अलावा गरीबों के 2 लाख रुपये तक के कर्ज माफ करने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया।

"जनता की आवाज को दबा नहीं सकती पुलिस"
अनशन के दौरान सभा को संबोधित करते हुए अनिल पासवान ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से आवाज उठाने वाले नेताओं को नजरबंद करना सरकार की तानाशाही को दर्शाता है। पुलिस उन्हें ब्लॉक मुख्यालय जाने से तो रोक सकती है, लेकिन आंदोलन को नहीं दबा सकती। उन्होंने कहा कि गरीबों और मजदूरों की हक की लड़ाई रुकने वाली नहीं है, कार्यकर्ता जहां रहेंगे वहीं से सत्ता तक अपनी आवाज पहुंचाएंगे।

अध्यक्षता और संचालन के बीच 8 अन्य कार्यकर्ता भी अनशन पर बैठे
इस अनशन सत्याग्रह में अनिल पासवान के साथ रामवचन वनवासी, पांचू यादव, कमला देवी, रामरती देवी, माराछी देवी, बैजंतीमाला, परमहंस राम और मोतीराम भी 24 घंटे के अनशन पर बैठे। कार्यक्रम की अध्यक्षता कामरेड धर्मपाल राम ने की और संचालन शहाबगंज ब्लॉक सचिव कामरेड रामायण राम ने किया। मौके पर मौजूद दर्जनों कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।