वन विभाग के 'तुगलकी फरमान' के खिलाफ भाकपा माले का हल्ला बोल, 15 जनवरी को चकिया में बड़ा प्रदर्शन
वन विभाग की नीतियों के खिलाफ भाकपा (माले) 15 जनवरी को चकिया में जोरदार प्रदर्शन करेगी। पार्टी ने वनाधिकार अधिनियम के तहत ग्रामीणों को मालिकाना हक देने और पर्यावरण के नाम पर हुए खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।
15 जनवरी को चंद्रप्रभा वन रेंज पर प्रदर्शन
पर्यावरण संरक्षण निधि का मांगा गया हिसाब
आदिवासियों को भूमि अधिकार देने की मांग
मान्यता विहीन गांवों को राजस्व गांव बनाने की अपील
काली पोखरा से निकलेगा विशाल जुलूस
चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र में वन विभाग द्वारा जारी कथित जनविरोधी आदेशों और आदिवासी हितों की अनदेखी के खिलाफ भाकपा (माले) ने आंदोलन का रास्ता अख्तियार कर लिया है। आगामी 15 जनवरी को पार्टी द्वारा चकिया और चंद्रप्रभा वन रेंज कार्यालय पर एक विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया जाएगा। इस आंदोलन की तैयारी के सिलसिले में सोमवार को पार्टी कार्यकर्ताओं ने तहसील प्रभारी विजई राम के नेतृत्व में स्थानीय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर अपनी मंशा साफ कर दी है।
पर्यावरण संरक्षण के बजट पर उठाए सवाल
भाकपा (माले) के नेताओं ने वन विभाग पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चंद्रप्रभा वन रेंज क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण के नाम पर करोड़ों रुपये पानी की तरह बहाए गए हैं। पार्टी ने मांग की है कि विभाग श्वेत पत्र जारी कर यह बताए कि अब तक कितनी धनराशि आवंटित हुई, कितने पौधे लगाए गए और धरातल पर उनमें से कितने जीवित बचे हैं। नेताओं का आरोप है कि कागजों पर हरियाली दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है, जिसका लाभ न तो प्रकृति को मिला और न ही स्थानीय जनता को।
वनाधिकार और राजस्व गांव का मुद्दा
आंदोलन का एक मुख्य बिंदु वनाधिकार अधिनियम के तहत आदिवासियों और ग्रामीणों को भूमि का मालिकाना हक दिलाना है। पार्टी के अनुसार, बलिया खुर्द और जोगिया कलां समेत चंद्रप्रभा रेंज के कई गांवों के दावेदारों ने वर्षों पहले आवेदन किया था, लेकिन प्रशासन ने उन्हें अब तक कानूनी अधिकार नहीं दिया है। इसके साथ ही, गढ़वा जैसे कई मान्यता विहीन गांवों को 'राजस्व गांव' घोषित करने की पुरजोर मांग की गई है, ताकि वहां के निवासी सड़क, बिजली, पानी और शिक्षा जैसी मूलभूत सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।
काली पोखरा से गूंजेगी प्रतिरोध की आवाज
आंदोलन की रणनीति साझा करते हुए नेताओं ने बताया कि 15 जनवरी को भाकपा (माले), खेग्रामस, किसान महासभा, आरवाईए और एपवा के बैनर तले एक संयुक्त मोर्चा निकाला जाएगा। यह जुलूस चकिया स्थित काली पोखरा से शुरू होकर पूरे नगर का भ्रमण करेगा और फिर वन विभाग के कार्यालय पर प्रतिरोध मार्च के रूप में संपन्न होगा।
पार्टी ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग और तहसील प्रशासन ने ग्रामीणों की इन जायज मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे अब और अधिक उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेंगे।