DM साहब आप भी ध्यान दीजिए...कभी भी टूट सकती है बेलावर बंधी, यहां पर तेज़ी से हो रहा है रिसाव

ग्रामीणों ने इस जर्जर स्थिति का कारण सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही को बताया है। उनका आरोप है कि विभाग द्वारा लंबे समय से बंधी का कोई रखरखाव या मरम्मत नहीं कराया गया है।
 

बेलावर बंधी टूटने का बढ़ने लगा है खतरा

आसपास के कई गांवों पर मंडराया जल प्रलय का संकट

सिंचाई व बंधी डिवीजन के अफसरों को नहीं है परवाह

चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत बेलावर गांव स्थित बंधी इस समय बड़े खतरे का संकेत दे रही है। क्षेत्र में हुई भारी बारिश के कारण यह बंधी बुरी तरह से जर्जर हो चुकी है, और पिछले कई दिनों से इससे तेज गति से पानी का रिसाव हो रहा है। इस खतरनाक स्थिति ने बंधी के नीचे बसे और आसपास के ग्रामीणों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।

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रिसाव इतना गंभीर है कि बंधी के ठीक नीचे बसे सुकुरुल्लाह, आरिफ और बरकतुल्लाह जैसे ग्रामीणों के मकानों तक पानी पहुंचने लगा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन ने जल्द ही इसकी मरम्मत नहीं कराई तो यह बंधी किसी भी वक्त टूट सकती है, जिससे बड़ा जान-माल का हादसा हो सकता है।

ग्रामीणों ने इस जर्जर स्थिति का कारण सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही को बताया है। उनका आरोप है कि विभाग द्वारा लंबे समय से बंधी का कोई रखरखाव या मरम्मत नहीं कराया गया है। परिणामस्वरूप, बरसात के मौसम में बंधी की दीवारों में बड़ी दरारें पड़ गई हैं और मिट्टी का कटाव तेजी से हो रहा है। लगातार रिसाव के कारण बंधी की संरचना दिन-प्रतिदिन कमजोर होती जा रही है, जिससे टूटने का खतरा निरंतर बढ़ता जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने आशंका व्यक्त की है कि यदि बंधी टूटी तो बेलावर, धन्नीपुर, कौड़िहार, रामशाला, खोजापुर समेत आसपास के कई गांव भीषण बाढ़ की चपेट में आ जाएंगे और जलमग्न हो जाएंगे। इस आपदा से न केवल सैकड़ों परिवारों की जान जोखिम में पड़ेगी, बल्कि खेतों में खड़ी फसलें और पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचेगा।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग से तत्काल प्रभाव से बंधी की मरम्मत कराने की पुरजोर मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते ठोस कदम न उठाए जाने पर यह बंधी क्षेत्र के लिए बड़ी आपदा साबित होगी। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी मांग पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो वे धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। यह समस्या अब जनसुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है।