विश्व पर्यावरण दिवस पर मसोई में 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान, किसानों को मिली मुफ्त प्रशिक्षण की सौगात
चंदौली के मसोई गांव में कृषि विज्ञान केंद्र और उद्यान विभाग ने संयुक्त रूप से किसान प्रशिक्षण व वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया। इसमें 100 से अधिक किसानों को मृदा स्वास्थ्य, धान नर्सरी प्रबंधन और फलदार पौधों के रोपण की आधुनिक तकनीक सिखाई गई।
मसौई गांव में किसान प्रशिक्षण आयोजित
'एक पेड़ मां के नाम' वृक्षारोपण
100 महिला-पुरुष किसानों की प्रतिभागिता
संतुलित उर्वरक और जैविक खेती पर जोर
धान नर्सरी और बीज शोधन तकनीक
चंदौली जिले के विकास खंड शहाबगंज के अंतर्गत ग्राम मसोई में पर्यावरण संरक्षण और उन्नत कृषि को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। "खेत बचाओ अभियान-स्वस्थ मिट्टी, सशक्त किसान, समर्थ भारत" तथा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर "एक पेड़ मां के नाम" वृहद वृक्षारोपण अभियान के तहत यहाँ किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित हुआ। यह कार्यक्रम आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (कुमारगंज, अयोध्या) द्वारा संचालित कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) चंदौली एवं जिला उद्यान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में संपन्न हुआ, जिसमें क्षेत्र के लगभग 100 महिला एवं पुरुष कृषकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मृदा स्वास्थ्य और जैविक खेती पर विशेष जोर
कार्यक्रम की अध्यक्षता कृषि विज्ञान केंद्र, चंदौली के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष डॉ. नरेंद्र रघुवंशी ने की। किसानों को संबोधित करते हुए उन्होंने मिट्टी की सेहत को बचाने की अपील की। उन्होंने मृदा स्वास्थ्य संरक्षण, संतुलित उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, जैविक एवं प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों के साथ-साथ मिट्टी की उत्पादकता और उर्वरता बढ़ाने वाले विभिन्न वैज्ञानिक उपायों के बारे में किसानों को अत्यंत विस्तृत व उपयोगी जानकारी प्रदान की।
धान की उन्नत खेती और नर्सरी प्रबंधन के गुर
खरीफ सीजन को ध्यान में रखते हुए केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अभयदीप गौतम ने कृषकों को धान की खेती से जुड़े महत्वपूर्ण टिप्स दिए। उन्होंने धान के बीज शोधन की सही और वैज्ञानिक विधि समझाई। इसके साथ ही उन्होंने प्रमाणित बीजों की समय पर उपलब्धता, धान की नर्सरी का बेहतर प्रबंधन तथा फसलों में लगने वाले प्रमुख रोगों व कीटों की पहचान कर उनके प्रभावी नियंत्रण के उपायों के संबंध में किसानों का मार्गदर्शन किया।
मिट्टी जांच की उपयोगिता और उर्वरक प्रबंधन
मृदा परीक्षण की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. चंदन सिंह ने किसानों को जागरूक किया। उन्होंने बताया कि किसानों को अपने खेतों की मिट्टी की जांच कब, क्यों और कैसे करानी चाहिए। डॉ. सिंह ने जोर देकर कहा कि मिट्टी जांच की रिपोर्ट के आधार पर ही खेतों में रासायनिक या जैविक उर्वरकों का प्रयोग किया जाना चाहिए, जिससे अनावश्यक खर्च से बचा जा सके और फसलों की पैदावार भी बेहतर हो।
वृक्षारोपण तकनीक और उद्यान विभाग की योजनाएं
उद्यान वैज्ञानिक श्री मनीष सिंह ने उपस्थित जनसमूह को विश्व पर्यावरण दिवस के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने फलदार पौधों के रोपण की उपयुक्त विधि, गड्ढों की वैज्ञानिक तैयारी तथा शुरुआती दौर में खाद प्रबंधन के विषय में किसानों को विस्तार से समझाया। वहीं, मौके पर उपस्थित जिला उद्यान अधिकारी श्री शैलेंद्र दुबे ने उद्यान विभाग द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, सरकारी पौधारोपण कार्यक्रमों और सब्जी उत्पादन की आधुनिक व उन्नत तकनीकों की जानकारी साझा की।
पर्यावरण संरक्षण का लिया गया संकल्प
कार्यक्रम के अंतिम चरण में "एक पेड़ मां के नाम" राष्ट्रव्यापी अभियान के अंतर्गत कृषि वैज्ञानिकों, अधिकारियों और स्थानीय किसानों द्वारा संयुक्त रूप से ग्रामीण परिवेश में कई फलदार एवं छायादार पौधों का विधि-विधान से रोपण किया गया। इस दौरान सभी उपस्थित अधिकारियों, कर्मचारियों और कृषकों ने पर्यावरण को स्वच्छ रखने तथा अपनी धरती मां की मृदा के स्वास्थ्य को संवर्धित करने का अटूट संकल्प लिया।