घुरहुपुर बौद्ध स्थल पर बड़ा खेल: बिना कनेक्शन चल रहा समरसेबल पंप, बिजली विभाग के एसडीओ बोले- हमें तो पता ही नहीं!

चंदौली के घुरहुपुर बौद्ध स्थल पर बिना वैध कनेक्शन के समरसेबल पंप चलाने का गंभीर आरोप लगा है। हद तो यह है कि बिजली पोल पर बिहार के निशान हैं और स्थानीय बिजली विभाग इस पूरे मामले से अनजान बना बैठा है।

 

घुरहुपुर बौद्ध स्थल पर बिना कनेक्शन चला समरसेबल

बिजली पोल पर दिखे बिहार राज्य के पहचान चिन्ह

25 केवीए का ट्रांसफार्मर किसकी अनुमति से लगा?

चकिया विद्युत विभाग के एसडीओ मामले से अनजान

लाखों की पानी टंकी के बाद भी पेयजल संकट

चंदौली जिले के चकिया तहसील क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसे सुनकर आप भी हैरान रह जाएंगे। यहाँ के प्रसिद्ध घुरहुपुर स्थित बौद्ध स्थल पर बनी पेयजल टंकी और वहां की बिजली व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि पहाड़ पर बनी पानी की टंकी तक जो बिजली पहुंच रही है, उसका कोई अता-पता ही नहीं है कि वह वैध है या अवैध।

हैरानी की बात यह है कि इसी बिजली की लाइन से टंकी को भरने वाला भारी-भरकम समरसेबल पंप धड़ल्ले से चलाया जा रहा है। लेकिन जब इसके पक्के सरकारी कनेक्शन और कागजातों के बारे में पता करने की कोशिश की गई, तो विभाग के पास इसका कोई जवाब नहीं मिला। बिना वैध कनेक्शन के सीधे लाइन से इस तरह समरसेबल चलाना सीधे तौर पर नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

यूपी के पर्यटन स्थल पर बिहार के खंभे, आखिर क्या है माजरा?
ग्रामीणों ने इस मामले में एक और बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। बौद्ध स्थल तक बिजली पहुंचाने के लिए रास्ते में करीब 13 बिजली के पोल (खंभे) खड़े किए गए हैं और बिजली की सप्लाई के लिए 25 केवीए का एक बड़ा ट्रांसफार्मर भी लगाया गया है। लेकिन जब लोगों की नजर इन खंभों पर पड़ी, तो सब दंग रह गए। इन बिजली के पोलों पर पड़ोसी राज्य बिहार के पहचान चिन्ह और पेंटिंग साफ-साफ दिखाई दे रही है।

अब क्षेत्र के लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि अगर ये ट्रांसफार्मर और खंभे दूसरे राज्य यानी बिहार से लाए गए हैं, तो इन्हें उत्तर प्रदेश की सीमा में लगाने की अनुमति किसने दी? आखिर किस सरकारी विभाग की मंजूरी से यह पूरा ढांचा खड़ा किया गया और इसका रिकॉर्ड किस दफ्तर की फाइलों में दर्ज है? ग्रामीणों का कहना है कि अगर यह कनेक्शन सही है, तो विभाग इसका उपभोक्ता नंबर और बिल का रिकॉर्ड जनता के सामने क्यों नहीं रखता।

लाखों रुपए पानी में बहे, लोग आज भी बूंद-बूंद को तरसे
आपको बता दें कि सरकार ने लाखों रुपए की भारी-भरकम लागत से इस पानी की टंकी का निर्माण कराया था। इसका असली उद्देश्य यह था कि घुरहुपुर बौद्ध स्थल पर आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों और आसपास के गांव के गरीब लोगों को पीने का साफ पानी मिल सके। लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। इस अव्यवस्था के चलते इलाके में लंबे समय से पानी की सप्लाई ठप पड़ी है और लोग पानी के लिए परेशान हो रहे हैं।

जब इस पूरे मामले पर चकिया बिजली विभाग के एसडीओ (SDO) संतोष सिंह से बात की गई, तो उनका जवाब बेहद गैर-जिम्मेदाराना था। उन्होंने साफ कह दिया कि इस पूरे मामले की उन्हें कोई जानकारी ही नहीं है और इसकी कोई भी डिटेल जिला कार्यालय स्तर से ही मिल सकती है। एसडीओ साहब के इस बयान के बाद जनता का गुस्सा और भड़क गया है कि जब स्थानीय अधिकारियों को ही कुछ नहीं पता, तो पहाड़ पर इतना बड़ा काम किसकी सह पर हो गया? अब ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस पूरे घोटाले की जांच कराकर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।