आखिर किसके संरक्षण में हो रही है शिकारगंज के राजपथ रेंज में पेड़ों की कटाई, वन विभाग की चुप्पी पर भी उठ रहे सवाल

विभाग के कर्मचारी कटाई रोकने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं। जबकि अवैध लकड़ी माफिया बिना किसी डर के रात-दिन पेड़ काट रहे हैं।
 

राजपथ रेंज में पेड़ों की रहस्यमय कटाई

वन विभाग की निष्क्रियता पर ग्रामीणों में रोष

सड़क किनारे टहनियां और पेड़ गायब हो रहे

ग्रामीणों ने उच्चस्तरीय जांच की मांग की

चंदौली जिले के चकिया के शिकारगंज राजपथ रेंज के सड़क किनारे खड़े सैकड़ों पेड़ एक-एक कर रहस्यमय तरीके से गायब हो रहे हैं। पहले उनकी टहनियां काटी जाती हैं और फिर कुछ दिनों बाद पूरा पेड़ ही अचानक नज़र नहीं आता। यह सिलसिला लंबे समय से जारी है, लेकिन वन विभाग इस पर पूरी तरह चुप्पी साधे हुए है। ग्रामीणों का कहना है कि अवैध कटाई खुलेआम हो रही है और जिम्मेदार केवल औपचारिक गश्त तक ही सीमित हैं।

वन विभाग की निष्क्रियता पर उठे सवाल

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग के कर्मचारी कटाई रोकने के बजाय मूकदर्शक बने हुए हैं। जबकि अवैध लकड़ी माफिया बिना किसी डर के रात-दिन पेड़ काट रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पेड़ पर्यावरण और गांव की जीवनरेखा हैं, लेकिन वन विभाग के रवैये से लगता है कि इस मुद्दे पर किसी की कोई चिंता नहीं है।

पौधारोपण सिर्फ दावा, हकीकत में असफल

पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि विभाग हर साल बड़े पैमाने पर पौधारोपण का दावा करता है, लेकिन सच्चाई यह है कि नए लगाए गए पौधों की देखभाल नहीं होती। सुरक्षा के अभाव में अधिकांश पौधे सूख जाते हैं या नष्ट हो जाते हैं। पुराने वृक्ष भी धीरे-धीरे कटकर समाप्त हो रहे हैं, जिससे हरियाली लगातार घट रही है।

आंकड़ों का अभाव

विभागीय सूत्रों के अनुसार, सड़क किनारे पेड़ों के बीच तीन मीटर की दूरी होनी चाहिए। इस आधार पर राजपथ रेंज की करीब 60 किलोमीटर लंबी पट्टी में लगभग 40 हजार पेड़ होने चाहिए। लेकिन विभाग के पास इन पेड़ों का कोई सटीक और अद्यतन आंकड़ा मौजूद नहीं है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में पेड़ कटने के बावजूद किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा।

जांच और कार्रवाई की मांग

ग्रामीणों ने इस अवैध कटाई पर रोक लगाने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि अगर यही हाल रहा तो राजपथ रेंज में हरियाली खत्म हो जाएगी और केवल झाड़ियां ही बचेंगी। लोगों ने उच्चस्तरीय जांच कर पेड़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।