हरिपुर स्कूल में कंपोजिट ग्रांट के धांधली, 2 साल से फंड का हो रहा दुरुपयोग..बीईओ ने दिए जांच के आदेश
हरिपुर स्कूल की बदहाली आई सामने
दीवारों पर जमी काई, नहीं हुई पुताई
दो साल से ग्रांट के दुरुपयोग का आरोप
बीईओ ओम प्रकाश मिश्रा ने दिया जांच का भरोसा
अभिलेखों और बिल-वाउचर के सत्यापन की मांग
चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र अंतर्गत सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं सुधारने और रख-रखाव के लिए मिलने वाली 'कंपोजिट ग्रांट' के इस्तेमाल को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय हरिपुर में दो सालों के बजट का सही इस्तेमाल न होने की बात कही जा रही है। विद्यालय के ही एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर प्रधानाध्यापक पर पिछले दो वर्षों से मिलने वाली ग्रांट की धनराशि के कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया है।
दीवारों पर जमी काई, लंबे समय से नहीं हुई रंगाई-पुताई
विद्यालय परिसर की मौजूदा स्थिति ग्रांट के उचित इस्तेमाल पर कई सवाल उठा रही है। शिक्षक के अनुसार, स्कूल की दीवारों पर हरी काई जमी हुई है और लंबे समय से रंगाई-पुताई तक नहीं कराई गई है। विद्यालय भवन और परिसर का रखरखाव बेहद खस्ताहाल है। आरोप है कि जब शासन स्तर से जरूरी सुविधाओं और मरम्मत के लिए बाकायदा बजट भेजा जाता है, तो उसका असर स्कूल की व्यवस्था और भवन की चमक-धमक में दिखना चाहिए।
फंड के बिल-वाउचर और अभिलेखों के सत्यापन की मांग
कंपोजिट ग्रांट का मुख्य मकसद सरकारी स्कूलों में दैनिक जरूरतों को पूरा करना और भवन की मरम्मत कराना होता है। हरिपुर विद्यालय की स्थिति को देखते हुए अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि पिछले दो वर्षों में इस मद में कितनी धनराशि आई और उसे कहां खर्च किया गया, इसका पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक किया जाए। बिल-वाउचर और कराए गए कार्यों का मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन होना बेहद जरूरी माना जा रहा है।
बीईओ ने दिया जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन
इस पूरे मामले पर खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) ओम प्रकाश मिश्रा से जब बात की गई, तो उन्होंने बताया कि फिलहाल यह प्रकरण उनके संज्ञान में नहीं था। उन्होंने स्पष्ट कहा कि मामले की पूरी निष्पक्षता से जांच कराई जाएगी और जो भी तथ्य निकलकर सामने आएंगे, उसके आधार पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग जांच में दोषी पाए जाने वालों पर क्या कदम उठाता है।