ISPL में चमके चंदौली के अंकित यादव: 6.5 लाख की बोली से लेकर घर वापसी पर जोरदार स्वागत तक की पूरी कहानी

 

चंदौली के छोटे से गांव भोड़सर के अंकित यादव ने ISPL में अपनी तेज गेंदबाजी से देशभर का दिल जीत लिया है। टाइगर ऑफ कोलकाता के लिए खेलते हुए शानदार प्रदर्शन के बाद घर लौटे अंकित का ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य स्वागत हुआ।

 
 

टाइगर ऑफ कोलकाता ने 6.5 लाख में खरीदा

ISPL फाइनल मुकाबले में चटकाए दो महत्वपूर्ण विकेट

पिता के निधन के बाद दादा ने तराशा हुनर

वाराणसी के सिगरा स्टेडियम से शुरू हुआ सफर

कक्षा 12 के छात्र की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान

 हौसले अगर बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो गांव की कच्ची गलियां भी कामयाबी के आसमान तक ले जाती हैं। चंदौली जिले के विकास खंड शहाबगंज के अंतर्गत आने वाले भोड़सर गांव के युवा तेज गेंदबाज अंकित यादव ने इस बात को सच कर दिखाया है। इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग (ISPL) में 'टाइगर ऑफ कोलकाता' की ओर से खेलते हुए अपनी धारदार गेंदबाजी से दिग्गजों को चकित करने के बाद, जब अंकित रविवार को अपने गृह जनपद लौटे, तो पूरा इलाका उनके स्वागत में उमड़ पड़ा।

ढोल-नगाड़ों और माल्यार्पण के साथ हुआ भव्य अभिनंदन
गुजरात के सूरत में आयोजित ISPL के रोमांचक फाइनल मुकाबले के बाद अंकित यादव जैसे ही अपने गांव पहुंचे, माहौल उत्सव में बदल गया। विकास खंड मुख्यालय पर ग्रामीणों, युवा खिलाड़ियों और स्थानीय समाजसेवियों ने अंकित को फूलों से लाद दिया। ढोल की थाप पर थिरकते युवाओं ने "अंकित यादव जिंदाबाद" के नारे लगाए। यह केवल एक खिलाड़ी का स्वागत नहीं था, बल्कि एक साधारण परिवार के बेटे की उस जीत का जश्न था, जिसने अभावों को मात देकर राष्ट्रीय मंच पर अपनी जगह बनाई।

पिता का साया उठा तो दादा ने संभाली कमान
अंकित की सफलता की राह फूलों की सेज नहीं थी। बहुत कम उम्र में ही उनके पिता नरेंद्र यादव का निधन हो गया था। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूटा, लेकिन अंकित के दादा कतवारू यादव ने हार नहीं मानी। उन्होंने पोते की आंखों में पल रहे क्रिकेट के सपने को मरने नहीं दिया। दादा ने न केवल अंकित की पढ़ाई सुनिश्चित की, बल्कि उसे वाराणसी के सिगरा स्टेडियम में पेशेवर प्रशिक्षण के लिए भेजा। गांव से वाराणसी तक का सफर और वहां कड़ा अभ्यास, अंकित की तपस्या का हिस्सा रहा।

6.5 लाख की बोली और फाइनल का वो प्रदर्शन
अंकित की मेहनत का फल तब मिला जब ISPL की मिनी नीलामी में 'टाइगर ऑफ कोलकाता' फ्रेंचाइजी ने उन पर 6.5 लाख रुपये की बड़ी बोली लगाकर सबको चौंका दिया। फास्ट बॉलर के रूप में चुने गए अंकित ने इस भरोसे को सही साबित किया। सूरत में खेले गए फाइनल मैच में अंकित ने अपनी सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग से विपक्षी टीम को दबाव में रखा और दो महत्वपूर्ण विकेट चटकाए। हालांकि उनकी टीम खिताब जीतने से चूक गई, लेकिन अंकित ने अपनी गेंदबाजी से भविष्य के लिए अपनी दावेदारी मजबूत कर ली है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने कक्षा 12 के छात्र
वर्तमान में सवैया गांव स्थित सर्व धर्म इंटर कॉलेज में कक्षा 12 के छात्र अंकित यादव अपनी सफलता का श्रेय अपने दादा और गुरुओं को देते हैं। स्वागत समारोह के दौरान खेल शिक्षक विकास यादव ने कहा, "अंकित शुरू से ही अनुशासित रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें सही मार्गदर्शन की जरूरत है।" वहीं समाजसेवी अजय जायसवाल ने कहा कि अंकित ने यह साबित कर दिया कि संसाधन सीमित हो सकते हैं, लेकिन लक्ष्य नहीं।

नई शुरुआत और भविष्य का संकल्प
अपनी इस उपलब्धि पर भावुक होते हुए अंकित यादव ने कहा, "यह तो बस मेरे जीवन की शुरुआत है। ISPL ने मुझे एक मंच दिया है, लेकिन मेरा सपना देश के लिए खेलना है। मैं अपने गांव, स्कूल और उन सभी लोगों के भरोसे पर खरा उतरने के लिए पहले से ज्यादा मेहनत करूंगा जिन्होंने मेरे कठिन समय में मेरा साथ दिया।"

इस ऐतिहासिक स्वागत कार्यक्रम में मुख्य रूप से गोलू श्रीवास्तव, रविन्द्र यादव, संजीव, पप्पू विश्वकर्मा, रत्नेश यादव, नसीम, राजू मोदनवाल, शिवबदन यादव, अमित सिंह, रामसूचित दुबे, अमित राव सहित सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण और प्रशंसक उपस्थित रहे।