कौमी एकता की मिसाल हैं बाबा लतीफशाह. 14 से 16 सितंबर तक चकिया में लगेगा 3 दिवसीय ऐतिहासिक मेला
बाबा लतीफशाह की मजार पर मेला
14 से 16 सितंबर तक आयोजन
कर्मनाशा नदी के तट पर मेला
करीब 100 साल पुरानी सामाजिक परंपरा
यूपी और बिहार से आएंगे श्रद्धालु
चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र में कौमी एकता और आपसी भाईचारे का प्रतीक माने जाने वाले बाबा लतीफशाह की मजार पर तीन दिवसीय ऐतिहासिक मेले का आयोजन होने जा रहा है। यह मेला आगामी 14 से 16 सितंबर तक बड़े ही धूमधाम से लगेगा। आयोजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं और क्षेत्र के लोगों में इस मेले को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। हर साल लगने वाला यह मेला स्थानीय लोगों के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का प्रमुख हिस्सा है।
कर्मनाशा नदी के तट पर जुटेगी भारी भीड़
लतीफशाह बांध के पास कर्मनाशा नदी के खूबसूरत तट पर यह मेला आयोजित होता है। इस तीन दिवसीय मेले में चंदौली जिले के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा पड़ोसी राज्य बिहार के कैमूर (भभुआ) जिले से भी बड़ी संख्या में जायरीन और सैलानी पहुंचते हैं। मेले को लेकर प्रशासनिक और स्थानीय स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
महाराजा उदित नारायण सिंह के दौर से जारी है परंपरा
मेला समिति के प्रबंधक सैयद अब्दुल कुद्दूस ने बताया कि बाबा लतीफशाह के मेले की परंपरा काफी पुरानी है। यह मेला महाराजा उदित नारायण सिंह के समय से, यानी लगभग सौ वर्षों से लगातार आयोजित होता चला आ रहा है। यह आयोजन इस पूरे क्षेत्र की एक प्राचीन धार्मिक और सामाजिक विरासत का अहम हिस्सा बन चुका है।
कौमी एकता और सामाजिक सौहार्द की मिसाल
यह ऐतिहासिक मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक एकता की अद्भुत मिसाल भी है। मेले में हिंदू, मुस्लिम सहित सभी धर्मों व विभिन्न समुदायों के लोग एक साथ मिलकर शिरकत करते हैं। मजार पर मत्था टेककर लोग देश और क्षेत्र में आपसी भाईचारे, शांति और सौहार्द का संदेश देते हैं।