कौमी एकता का प्रतीक बाबा लतीफशाह मेले का गुरूवार को होगा शुभारंभ, उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब
कर्मनाशा नदी किनारे बाबा लतीफशाह और बाबा बनवारी दास की स्थली पर सजेगा मेला
पूर्वांचल और बिहार से आएंगे हजारों जायरीन
मजार पर जियारत और मंदिर में पूजा अर्चना करेंगे श्रद्धालु
हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है यह ऐतिहासिक मेला
चंदौली जिला के चकिया तहसील क्षेत्र में कर्मनाशा नदी के किनारे बसे बाबा लतीफ शाह और बाबा बनवारी दास की पवित्र स्थली पर कल 28 अगस्त गुरुवार को ऐतिहासिक मेला लगेगा। इस मेले में पूर्वांचल के कई जिलों के साथ बिहार प्रांत से भी भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। इस दौरान बाबा लतीफ शाह की मजार पर जियारत करेंगे एवं बाबा बनवारी दास के मंदिर पर पूजा अर्चना करेंगे।
बाबा लतीफ शाह और बाबा बनवारी दास की पवित्र स्थली पर लगने वाला यह मेला कौमी एकता का प्रतीक है, जहां हिंदू और मुस्लिम श्रद्धालु एक साथ आते हैं और अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। मेले में सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी उठानी ना पड़े।
मेले के आयोजन को लेकर प्रशासन पूरी तरह से तैयार है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मेले में मौजूद रहेंगे। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं का भी इंतजाम किया गया है।
कौमी एकता का प्रतीक है ऐतिहासिक मेला
बाबा लतीफ शाह और बाबा बनवारी दास की पवित्र स्थली पर लगने वाला यह मेला हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक है। इस मेले में दोनों समुदायों के लोग एक साथ आते हैं और अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं। यह मेला क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक एकता का प्रतीक है ।