गांव में गूंजे माता शबरी के जयकारे: जन्मोत्सव पर हवन-पूजन और विशाल भंडारे का आयोजन

 

शहाबगंज के खास गांव में माता शबरी जन्मोत्सव श्रद्धापूर्वक मनाया गया। विधि-विधान से पूजन और भजन-कीर्तन के बाद विशाल भंडारे का आयोजन हुआ, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।

 
 

विधि-विधान से हुआ हवन और पूजन

माता शबरी के भजनों पर झूमे श्रद्धालु

विशाल भंडारे में उमड़ी ग्रामीणों की भीड़

भक्ति और सेवा के आदर्शों पर चर्चा

भाजपा मंडल अध्यक्ष ने दी बधाई

चंदौली जनपद के विकासखंड शहाबगंज अंतर्गत खास गांव में रविवार को माता शबरी जन्मोत्सव पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक श्रद्धा के साथ मनाया गया। भक्ति, त्याग और अटूट विश्वास की प्रतीक माता शबरी के जन्मोत्सव पर गांव में विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की गई, जिससे संपूर्ण क्षेत्र का वातावरण भक्तिमय हो गया।

हवन-पूजन और भजन-कीर्तन से गूंजा गांव
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः काल विधि-विधान से पूजन और हवन के साथ हुआ। विद्वान पुरोहितों के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने आहुतियां दीं और क्षेत्र की खुशहाली की कामना की। इसके पश्चात आयोजित भजन-कीर्तन ने समां बांध दिया। स्थानीय कलाकारों और श्रद्धालुओं ने माता शबरी के जीवन और श्रीराम के प्रति उनके अनन्य प्रेम पर आधारित भजनों की प्रस्तुति दी। ढोलक और मजीरों की थाप पर श्रद्धालु झूमते नजर आए, जिससे माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक हो गया।

भंडारे में दिखी सामाजिक समरसता
धार्मिक अनुष्ठान की पूर्णाहुति के बाद एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। इस भंडारे की विशेष बात यह रही कि इसमें गांव के सभी वर्गों, आयु और समुदाय के लोगों ने एक साथ बैठकर प्रसाद ग्रहण किया। यह दृश्य माता शबरी के उन आदर्शों को जीवंत कर रहा था, जो ऊंच-नीच के भेदभाव को मिटाकर प्रेम और समानता का मार्ग दिखाते हैं। आयोजन में महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं ने बढ़-चढ़कर श्रमदान किया।

माता शबरी का जीवन सेवा का प्रतीक: रिंकू विश्वकर्मा
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित भाजपा मंडल अध्यक्ष रिंकू विश्वकर्मा ने माता शबरी के चित्र पर माल्यार्पण किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा, "माता शबरी का जीवन हमें सिखाता है कि सच्ची भक्ति के लिए किसी आडंबर की आवश्यकता नहीं होती। उनका त्याग और प्रतीक्षा की पराकाष्ठा ही थी कि स्वयं भगवान राम उनकी कुटिया तक पहुंचे। उनके आदर्श आज भी समाज को प्रेम और समर्पण का संदेश देते हैं।" उन्होंने आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम सांस्कृतिक चेतना को जागृत करते हैं।

आयोजन में  सक्रिय भागीदारी
कार्यक्रम को भव्य बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर मुख्य रूप से मुक्खु (पुजारी), शिवलोचन, महेन्द्र, राजेश, पप्पू, गुड्डू, नरसिंह, अशोक, सोनू, गुल्लू, जमुना, प्रकाश, राजबाबू, मनोज कुमार, श्रीवास्तव, सुशील दुबे, महेश गोंड, अनीश पटेल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और भक्तगण उपस्थित रहे।

ग्रामीणों ने बताया कि माता शबरी के जन्मोत्सव का यह आयोजन हर वर्ष श्रद्धा के साथ किया जाता है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली परंपराओं और महान विभूतियों के बारे में जागरूक करना है।