मजदूर नेता की मांग: मनरेगा में मिले 200 दिन काम और 600 रुपये मजदूरी, नई योजना की जगह मनरेगा बहाल करने की मांग

चंदौली में एआईपीएफ नेता अजय राय ने शहरों में बढ़ते रोजगार संकट और महंगाई के बीच मनरेगा को पुनः बहाल करने की मांग की है। उन्होंने मजदूरों के लिए 200 दिन काम और 600 रुपये दैनिक मजदूरी देने की अपील की।

 
 

शहरों में गहराया रोजगार संकट

मनरेगा को तत्काल बहाल करें

मजदूरों को मिले 200 दिन काम

दैनिक मजदूरी 600 रुपये की जाए

चंदौली जनपद सहित देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। ऑल इंडिया पीपुल्स फ्रंट (एआईपीएफ) की राष्ट्रीय फ्रंट कमेटी के सदस्य अजय राय ने समाधान दिवस के अवसर पर चकिया तहसील में अधिकारियों के समक्ष इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि नई वैश्विक परिस्थितियों के कारण देश में रोजगार का संकट काफी गहरा गया है। इसके साथ ही बेकाबू महंगाई ने आम जनता और मजदूरों की कमर तोड़कर रख दी है। जो मजदूर आजीविका की तलाश में ग्रामीण इलाकों से शहरों की ओर गए थे, उनके सामने अब रोजी-रोटी का बड़ा संकट पैदा हो गया है। छोटी-छोटी कंपनियां बंद हो रही हैं और बढ़ती महंगाई के कारण लोगों को वापस अपने गांवों की ओर लौटने पर मजबूर होना पड़ रहा है।

'वी बी जी राम जी' योजना पर खड़े हुए सवाल
अजय राय ने कहा कि मौजूदा हालात बिल्कुल कोरोना काल जैसी विषम परिस्थितियों की तरफ बढ़ रहे हैं। कोरोना महामारी के समय मनरेगा ने संकटमोचक की भूमिका निभाई थी और ग्रामीण मजदूरों को काफी हद तक रोजगार देकर उनके आर्थिक संकट को हल किया था। लेकिन सरकार ने मनरेगा कानून को बदलकर एक अप्रैल से 'वी बी जी राम जी' योजना लागू कर दी है। इसके बावजूद आज भी ग्रामीण इलाकों में मजदूरों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है। एआईपीएफ नेता ने मांग की कि 'वी बी जी राम जी' योजना को तत्काल वापस लिया जाए और मजदूरों के हित में मनरेगा कानून को पूरी तरह से बहाल किया जाए। इस संबंध में उन्होंने चकिया तहसील में आए एडीएम, उपजिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी को ज्ञापन देकर रोजगार संकट को दूर करने की अपील की।

200 दिन काम और 600 रुपये मजदूरी की मांग
मजदूर संगठनों और एआईपीएफ की तरफ से सरकार से मांग की गई है कि मनरेगा के तहत मिलने वाले काम के दिनों को बढ़ाकर 200 दिन किया जाए और दैनिक मजदूरी को बढ़ाकर 600 रुपये किया जाए। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, चंदौली जनपद में वर्ष 2020-21 के कोरोना काल के दौरान रिकॉर्ड संख्या में ग्रामीण मजदूरों को रोजगार दिया गया था। उस समय कुल सक्रिय श्रमिकों की संख्या लगभग 1.59 लाख थी, जो मनरेगा से जुड़े थे। जबकि कुल जॉब कार्ड धारक करीब 2.63 लाख थे। उस दौरान चक रोड, तालाब खुदाई, चक नाली और वृक्षारोपण जैसे महत्वपूर्ण कार्य कराए गए थे। आज भी वैसी ही परिस्थितियां हैं, इसलिए सरकार को मजदूरों का बजट बढ़ाना चाहिए ताकि उन्हें काम मिल सके।

बकाया भुगतान करने की मांग
अजय राय ने कहा कि रोजगार देने में विफलता के साथ-साथ सरकार की तरफ से महीनों से मनरेगा की मजदूरी और पक्के कार्यों का भुगतान बकाया रखा गया है। कई वर्षों से पक्के कार्यों का पैसा नहीं मिला है, जिसका भुगतान सरकार को तत्काल करना चाहिए। उन्होंने गैस संकट और व्यावसायिक सिलेंडरों के बढ़ते दामों पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों की वजह से रेहड़ी-पटरी वाले और छोटे रेस्टोरेंट बंद हो रहे हैं, जिससे बेरोजगारी और अधिक बढ़ रही है। सरकार समय रहते इन समस्याओं का समाधान करे, अन्यथा मजदूरों का यह आंदोलन और उग्र रूप लेगा। एआईपीएफ नेता अजय राय ने संपूर्ण समाधान दिवस पर अधिकारियों के समक्ष रोजगार उपलब्ध कराने की मांग को दृढ़ता से दोहराया।