चकिया और नौगढ़ के जंगलों में छोड़ी गईं 2 मादा तेंदुआ, मुरादाबाद से लाकर आज किया गया रिलीज
चंदौली के चकिया और नौगढ़ के जंगलों में दो मादा तेंदुओं को छोड़ा गया है। मुरादाबाद से लाई गईं तेंदुओं को सुरक्षित वन क्षेत्र में रिलीज किया गया। तेंदुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।
चकिया और नौगढ़ के जंगलों में छोड़ी गई मादा तेंदुआ
मुरादाबाद से पकड़कर लाई गई थीं दोनों तेंदुआ
लेहड़ा उत्तरी बीट और सपहर बीट में किया रिलीज
एक साल में आधा दर्जन तेंदुए छोड़े गए
वन विभाग ने जंगल से सटे गांवों को किया अलर्ट
ये दोनों तेंदुए मुरादाबाद से पकड़कर लाई गई थीं। वन विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में इन्हें उनके अनुकूल प्राकृतिक माहौल में रिलीज किया गया।
लेहड़ा और सपहर बीट में किया गया रिलीज
जानकारी के मुताबिक चकिया वन रेंज के लेहड़ा उत्तरी बीट में एक मादा तेंदुआ छोड़ी गई है। वहीं दूसरी तेंदुआ को नौगढ़ रेंज के सपहर बीट के जंगल में छोड़ा गया है।
दोनों तेंदुओं को छोड़ने की पूरी प्रक्रिया क्षेत्रीय वन अधिकारी अश्विनी चौबे और संजय श्रीवास्तव की देखरेख में हुई। विभाग का मकसद जंगल में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखना है।
एक साल में आधा दर्जन तेंदुए छोड़े गए
बताया जा रहा है कि पिछले एक साल के अंदर चंदौली के जंगलों में आधा दर्जन से ज्यादा तेंदुओं को छोड़ा जा चुका है। इससे साफ है कि जिले के जंगल तेंदुओं के लिए अनुकूल होते जा रहे हैं।
तेंदुओं की मौजूदगी बढ़ने से जंगल का इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है। लेकिन साथ ही जंगल से सटे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए खतरा भी बढ़ गया है।
वन विभाग ने लोगों को किया सतर्क
तेंदुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए वन विभाग ने जंगल के किनारे बसे गांवों के लोगों को खास तौर पर सतर्क रहने को कहा है। विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अकेले जंगल की तरफ न जाएं।
खासकर शाम और रात के समय जंगल में जाने से बचें। अगर किसी को तेंदुआ दिखता है तो उसके पास जाने या उसे छेड़ने की कोशिश न करे। तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दे।
अफवाहों से बचने की अपील
वन अधिकारियों ने लोगों से कहा है कि तेंदुए की मौजूदगी को लेकर किसी भी तरह की अफवाह न फैलाएं और न ही अफवाहों पर ध्यान दें। सतर्क रहें और सावधानी बरतें।
वन विभाग के अनुसार वन्यजीवों से दूरी बनाए रखना और समय पर विभाग को जानकारी देना ही इंसान और वन्यजीव के बीच टकराव को रोकने का सबसे सुरक्षित तरीका है। ग्रामीणों से सहयोग की अपील की गई है।