जनकपुर माइनर में किसानों को नहीं मिल रहा है सिंचाई का पूरा पानी, केवल हवा-हवाई दावा
सिंचाई विभाग लापरवाही से माइनर खुलते ही टूटा
धान के रोपाई का संकट गहराया
आक्रोशित किसानों ने आंदोलन का दिया चेतावनी
चंदौली जिले की चकिया तहसील क्षेत्र के जनकपुर माइनर में किसानों की सिंचाई की आस एक बार फिर झूठी साबित हुई, जब बुधवार को लतीफशाह डैम से छोड़ा गया पानी एमिनर की मरम्मत व सफाई न होने की वजह से करीब 200 मीटर आगे जाकर टूट गया। अधिकारियों को माइनर को तुरंत बंद करना पड़ा, जिससे क्षेत्र के 22 गाँवों के किसानों की धान रोपाई की योजना पर संकट मंडरा गया।
किसानों ने बताया कि धान के बीज तैयार होने के बाद पानी की मांग तेजी से बढ़ी थी। इसी को ध्यान में रखते हुए बुधवार सुबह राइट कर्मनाशा नहर के साथ-साथ जनकपुर माइनर को भी खोला गया। लेकिन माइनर की सिल्ट एवं मिट्टी से भरी नहर की सफाई न होने के कारण, पानी छोड़ने के महज एक घंटे बाद ही लतीफशाह डैम से लगभग 200 मीटर आगे माइनर टूट गया और बहते पानी को राइट कर्मनाशा नहर में चढ़ा लिया गया। आगे का नुक़सान टलाया गया लेकिन माइनर को तत्काल बंद करना पड़ा, जिससे सिंचाई फिर से रुक गई।
क्षेत्रीय किसान अखिलेश दूबे, सत्य प्रकाश द्विवेदी, विनोद लाल श्रीवास्तव व रविकांत सहित अन्य किसानों का आरोप है कि माइनर की सफाई और मरम्मत के लिए पिछले महीने लाखों रुपए स्वीकृत हुए थे। बावजूद इसके, विभागीय लापरवाही एवं अनदेखी की बजह से उक्त कार्य नहीं हो पाया, जिससे माइनर टूट कर विभाग की लापरवाही का बेजा उदाहरण बन गया।
स्थानीय किसान नेता राधेश्याम पांडे ने पहले भी जनकपुर माइनर की सफाई व मरम्मत न होने पर चिंता जताई थी। उन्होंने बताया कि माइनर का “दक्षिणी बैंक हेड से टेल तक जर्जर है” और हेड पर घास व मिट्टी जमा होने की वजह से पानी की क्षमता प्रभावित हो रही है । इसी लापरवाही पर पहले भी पानी का रिसाव चल रहा था, जिस पर चेतावनी दी गई थी कि यदि समय रहते मरम्मत न हुई तो किसानों के रोपाई प्रभावित होंगी।
किसानों ने विभागीय अधिकारियों से तत्काल माइनर की मरम्मत व सफाई कराने, नहरों को दोबारा चालू करने और पूरी पानी आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन मांगों को जल्द नहीं माना गया तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे।
यह क्षेत्र लतीफशाह डैम और कर्मनाशा नहर प्रणालियों पर निर्भर है और पूरे मौसम में सिंचाई के लिए पानी की सख्त आवश्यकता होती है। पिछले वर्ष भी इसी लापरवाही के कारण किसानों ने प्रदर्शन किया था, वहीं इससे पहले राइट कनाल गेट की स्थिति खराब पाई थी जिससे हजारों लीटर पानी का बर्बाद होना समाज में नाराजगी बढ़ाता रहा ।
अब किसानों की निगाह जिला एवं राज्य स्तरीय अधिकारियों की ओर टिकी है, कि क्या निर्माण व मरम्मत विभाग समय रहते संज्ञान लेगा या फिर किसान अपनी आवाज सड़कों पर बुलंद करने को बाध्य होंगे।