राम जन्म प्रसंग से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु, मसोई में भक्तिमय हुआ माहौल; नौ दिवसीय राम कथा शुरू
चंदौली के मसोई हनुमान मंदिर में नौ दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य आगाज हुआ। डॉ. विनय प्रकाश तिवारी के साथ अन्य अतिथियों ने दीप प्रज्वलन कर शुरुआत की। कथा के दूसरे दिन राम जन्म प्रसंग ने श्रद्धालुओं को भक्ति के सागर में डुबो दिया।
मसौई हनुमान मंदिर में राम कथा
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का विशेष योगदान
राम जन्म प्रसंग से गूंजा पंडाल
14 वर्षों से जारी है परंपरा
अयोध्या तीर्थयात्रा सेवा की हुई सराहना
चंदौली जिले के शहाबगंज ब्लॉक के मसोई स्थित हनुमान मंदिर प्रांगण में इन दिनों भक्ति की बयार बह रही है। मानस परिवार सेवा समिति द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा का भव्य शुभारंभ डॉ. विनय प्रकाश तिवारी (संस्थापक, एलटीपी कैलकुलेटर एवं डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल) ने दीप प्रज्वलन करके किया। पिछले 14 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही यह कथा क्षेत्र में आस्था का सबसे बड़ा केंद्र बन गई है। 24 अप्रैल से शुरू हुई यह कथा 2 मई तक चलेगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु धर्म लाभ लेने पहुंच रहे हैं।
भक्ति और धर्म का संदेश
कथा के दौरान परमपूज्य कथा व्यास श्री अतुल कृष्ण भारद्वाज जी महाराज ने भगवान की भक्ति और धर्म के महत्व को अत्यंत सरल और रोचक ढंग से समझाया। व्यास जी ने अपने प्रवचन में कहा कि प्रभु श्रीराम के दर्शन उन्हीं को होते हैं जिनका मन निर्मल और स्वच्छ होता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब-जब धरती पर अधर्म का भार बढ़ता है, तब-तब ईश्वर अवतार लेकर धर्म की पुनर्स्थापना करते हैं। उन्होंने युवाओं को अपनी संस्कृति और गौरवशाली इतिहास से जुड़ने का आह्वान किया।
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी की सेवा भावना को नमन
इस अवसर पर कथा व्यास ने डॉ. विनय प्रकाश तिवारी द्वारा संचालित 'नि:शुल्क अयोध्या तीर्थयात्रा सेवा' की खुले मंच से प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि डॉ. तिवारी जिस प्रकार से समाज सेवा के कार्य कर रहे हैं, वह अनुकरणीय है। यह निस्वार्थ सेवा लोगों को भगवान श्रीराम से जोड़ने का एक पुनीत माध्यम बन रही है। इस दौरान पूर्व जिला पंचायत सदस्य सूर्यमुनि तिवारी और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सरिता सिंह भी उपस्थित रहीं।
राम जन्म प्रसंग पर गूंजे जयकारे
कथा के प्रथम दिन महाराज जी ने अगस्त मुनि, याज्ञवल्क्य ऋषि और भारद्वाज मुनि के जीवन प्रसंगों का उल्लेख करते हुए उनके त्याग और ज्ञान की महिमा का गुणगान किया। वहीं, दूसरे दिन कथा ने तब शिखर छुआ जब भगवान श्रीराम के जन्म का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। व्यास जी ने बताया कि त्रेता युग में जब असुरों का अत्याचार चरम पर था, तब भगवान विष्णु ने माता कौशल्या की कोख से श्रीराम के रूप में अवतार लिया।
जैसे ही राम जन्म का प्रसंग आया और भजनों की धुन गूंजी, पूरा पंडाल “जय श्री राम” के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूम उठे और पुष्प वर्षा के बीच पूरा वातावरण राममय हो गया। माताओं को संबोधित करते हुए महाराज जी ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान सात्विक जीवनशैली अपनाकर ही आने वाली पीढ़ी को संस्कारित बनाया जा सकता है। यह कथा न केवल धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह हमारे जीवन को नई दिशा देने का एक सार्थक प्रयास है।