सिकंदरपुर के साहित्यकार राजेश विश्वकर्मा को मिला 'हिंदी रत्न सम्मान–2026', साहित्य सरोवर संस्था ने किया सम्मानित
चंदौली के प्रख्यात साहित्यकार राजेश विश्वकर्मा को उनकी उत्कृष्ट काव्य प्रस्तुति के लिए प्रतिष्ठित 'हिंदी रत्न सम्मान–2026' से नवाजा गया है। साहित्य सरोवर संस्था द्वारा आयोजित विश्व हिंदू दिवस कार्यक्रम में उनके सृजनात्मक योगदान की सराहना की गई।
साहित्यकार राजेश विश्वकर्मा को हिंदी रत्न सम्मान
साहित्य सरोवर संस्था ने किया सम्मानित
विश्व हिंदू दिवस पर ऑनलाइन काव्य पाठ
सिकंदरपुर गांव का बढ़ा साहित्यिक मान
राजेश विश्वकर्मा के सृजनात्मक लेखन को सराहना
साहित्य और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में समर्पित संस्था 'साहित्य सरोवर' ने विश्व हिंदू दिवस के उपलक्ष्य में चंदौली का नाम रोशन करने वाले साहित्यकार राजेश विश्वकर्मा को 'हिंदी रत्न सम्मान–2026' प्रदान किया है। जिले के चकिया तहसील अंतर्गत सिकंदरपुर निवासी राजेश विश्वकर्मा को यह सम्मान उनके प्रभावशाली ऑनलाइन एकल काव्य पाठ और हिंदी साहित्य में उनके निरंतर उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया है।
ऑनलाइन काव्य पाठ में बिखेरा रचनाओं का जादू
साहित्य सरोवर संस्था द्वारा आयोजित इस विशेष डिजिटल कार्यक्रम में देशभर के प्रख्यात साहित्यकारों ने शिरकत की थी। राजेश विश्वकर्मा ने अपनी सृजनात्मक लेखनी और ओजपूर्ण प्रस्तुति से श्रोताओं और निर्णायक मंडल को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी रचनाओं में भारतीय संस्कृति, सामाजिक संवेदना और मानवीय मूल्यों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। आयोजकों ने उनके लेखन की गहराई और शब्दों के चयन की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।
क्षेत्र के बुद्धिजीवियों और गणमान्यों ने दी बधाई
राजेश विश्वकर्मा को यह सम्मान मिलने की खबर जैसे ही सिकंदरपुर और आसपास के क्षेत्रों में पहुंची, खुशी की लहर दौड़ गई। वरिष्ठ साहित्यकार मनोज द्विवेदी 'मधुर', हरिवंश सिंह, बवाल बंधु और डॉ. गीता शुक्ला सहित कई शिक्षाविदों ने इसे जिले के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण बताया। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि सत्य प्रकाश गुप्ता और सेवानिवृत्त सैनिक श्यामलाल विश्वकर्मा ने कहा कि राजेश विश्वकर्मा का साहित्य न केवल समाज को आइना दिखाता है, बल्कि युवा पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करता है।
साहित्य साधना को मिली नई ऊर्जा
सम्मान प्राप्त करने के बाद राजेश विश्वकर्मा ने साहित्य सरोवर संस्था का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, "यह सम्मान मेरी व्यक्तिगत जीत नहीं, बल्कि हिंदी भाषा के प्रति मेरे समर्पण का प्रतिफल है। यह पुरस्कार मुझे भविष्य में और अधिक जिम्मेदारी के साथ साहित्य साधना करने की प्रेरणा देगा।" उन्होंने संकल्प लिया कि वे अपनी लेखनी के माध्यम से हिंदी भाषा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए सदैव प्रयासरत रहेंगे।
प्रेरणा का स्रोत बनी उपलब्धि
कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य लोगों का मानना है कि इस तरह के सम्मानों से न केवल साहित्यकारों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि समाज में रचनात्मकता को भी बढ़ावा मिलता है। राजेश विश्वकर्मा की इस उपलब्धि ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि चंदौली की माटी में साहित्य और कला के अनमोल रत्न मौजूद हैं।