सैदूपुर बुद्ध विहार में भन्ते बंदना की देशना कथा: राजकुमार नहीं, मानवता के मसीहा के रूप में हुआ था बुद्ध का जन्म
चंदौली के सैदूपुर बुद्ध विहार में आयोजित पांच दिवसीय संगीतमय बुद्ध धम्म देशना कथा के दूसरे दिन बोधगया से आईं भन्ते बंदना ने भगवान बुद्ध के लुंबिनी में हुए अलौकिक जन्मोत्सव की अत्यंत प्रेरणादायी कथा सुनाई।
पांच दिवसीय बुद्ध धम्म देशना कथा
बोधगया की भन्ते बंदना का प्रवचन
लुंबिनी वन में बुद्ध जन्म का प्रसंग
करुणा और अहिंसा का दिव्य संदेश
भक्तिमय गीतों से सराबोर हुआ वातावरण
चंदौली जिले की चकिया तहसील के अंतर्गत सैदूपुर स्थित बुद्ध विहार महामाया सरोवर के तत्वावधान में पांच दिवसीय संगीतमय सनातनी बुद्ध धम्म देशना कथा का भव्य आयोजन किया जा रहा है। इस धार्मिक उत्सव के दूसरे दिन भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी। कार्यक्रम में विशेष रूप से बोधगया से पधारीं प्रख्यात कथावाचिका भन्ते बंदना ने भगवान बुद्ध के पावन जन्मोत्सव से जुड़ी कई मार्मिक और प्रेरणादायी कथाओं का विस्तार से वर्णन किया। इस अद्भुत प्रसंग को सुनकर उपस्थित सभी श्रद्धालु पूरी तरह भावविभोर हो उठे।
लुंबिनी वन में हुआ था सिद्धार्थ का जन्म, झूम उठी थी प्रकृति
कथावाचिका भन्ते बंदना ने इतिहास के पन्नों को पलटते हुए श्रद्धालुओं को बताया कि प्राचीन काल में कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन और रानी महामाया के यहां भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। उन्होंने मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जब रानी महामाया अपने मायके देवदह जा रही थीं, तब रास्ते में कपिलवस्तु और देवदह के बीच स्थित रोहिणी नदी के समीप एक बेहद सुंदर और रमणीय वन 'लुंबिनी' में उन्होंने पुत्र को जन्म दिया। जैसे ही यह शुभ समाचार चारों तरफ फैला, पूरे राज्य में हर्ष और उल्लास की लहर दौड़ गई।
कपिलवस्तु में दीप जलाकर बांटी गईं मिठाइयां
भन्ते बंदना ने आगे बताया कि दिव्य राजकुमार के जन्म का मंगल समाचार मिलते ही महाराजा शुद्धोधन की प्रसन्नता का ठिकाना नहीं रहा। माता महामाया और नवजात शिशु को पूरे राजसी सम्मान के साथ वापस कपिलवस्तु लाया गया। उस समय राजमहल से लेकर नगर के प्रत्येक साधारण घर तक सिर्फ और सिर्फ उत्सव का माहौल था। पूरी प्रजा ने अपनी खुशी का इजहार करने के लिए जगह-जगह दीप जलाए, मधुर मिठाइयां बांटीं और मंगल गीत गाकर राजकुमार का स्वागत किया। तब कपिलवस्तु की गलियां पूरी तरह आनंद में डूब गई थीं।
मानवता, करुणा और अहिंसा का संदेश हैं भगवान बुद्ध
व्यासपीठ से कथावाचिका ने गंभीर संदेश देते हुए कहा कि भगवान बुद्ध का धरती पर अवतरण केवल एक साधारण राजकुमार के रूप में नहीं हुआ था। बल्कि उनका प्राकट्य पूरी मानवता को करुणा, परम अहिंसा, सत्य और आत्मिक शांति का सच्चा मार्ग दिखाने के लिए हुआ था। उनके जन्म ने पूरी दुनिया को एक ऐसा महान संदेश दिया, जिसने मानव कल्याण और विश्व शांति की राह को हमेशा के लिए प्रशस्त कर दिया। उन्होंने उपस्थित भक्तों से बुद्ध के सिद्धांतों को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने की अपील की।
बुद्ध वंदना और धार्मिक गीतों से भक्तिमय हुआ माहौल
इस दिव्य कथा के दौरान सुंदर बुद्ध वंदना और भक्ति से सराबोर धार्मिक गीतों की प्रस्तुति की गई, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक रंग में रंग गया। कार्यक्रम के दौरान रमेश मौर्य, जलज कुमार, क्रांति कुमार, मनगोई बौद्ध, गौरीशंकर मौर्य, लालजी, नंदलाल, रामअवतार मौर्य, लवकुश गुप्ता, नागेंद्र मौर्य, नंदलाल शास्त्री, शकुंतला मौर्य, श्यामा देवी और सुमित्रा नवज्योति सहित क्षेत्र के अनेक बौद्ध अनुयायी और गणमान्य लोग मुख्य रूप से उपस्थित रहे। सभी ने इस धर्म लाभ का आनंद लिया।