सैदूपुर में बुढ़वा मंगल की धूम: हनुमान मंदिर प्रांगण में लोक संगीत और कवि सम्मेलन ने बांधा समां, देर शाम तक झूमे श्रोता

चंदौली के सैदूपुर में बुढ़वा मंगल के अवसर पर आयोजित लोक संगीत एवं कवि सम्मेलन में कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से जादू बिखेरा। भक्ति गीतों से लेकर हास्य व्यंग्य की कविताओं तक, इस कार्यक्रम ने श्रोताओं को देर शाम तक मंत्रमुग्ध कर दिया।

 

उस्ताद हरिवंश सिंह की स्मृति में भव्य आयोजन

लोकगायक संतोष द्विवेदी की भक्तिमय प्रस्तुति

कवि सम्मलेन में हास्य और सामाजिक कटाक्ष

मुख्य अतिथि संजय सिंह द्वारा कलाकारों का सम्मान

सैदूपुर हनुमान मंदिर में सांस्कृतिक संध्या का आयोजन

चंदौली जनपद के शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत सैदूपुर स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर के प्रांगण में मंगलवार को बुढ़वा मंगल के पावन अवसर पर एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उस्ताद हरिवंश सिंह की पावन स्मृति में आयोजित इस लोक संगीत एवं कवि सम्मेलन ने क्षेत्रीय जनता को अपनी समृद्ध परंपराओं से रूबरू कराया। कार्यक्रम का शुभारंभ उस्ताद हरिवंश सिंह के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया, जिसके बाद देर शाम तक सुरों और शब्दों की महफिल सजी रही।

भक्ति और लोकगीतों से गुंजायमान हुआ वातावरण
कार्यक्रम की शुरुआत लोकगायक संतोष द्विवेदी ने अपनी सुमधुर आवाज में "शंभू संग खेलत होरी, श्री गिरिराज किशोरी" भजन प्रस्तुत कर की। उनकी इस प्रस्तुति ने पूरे माहौल को भक्ति के रंग में सराबोर कर दिया। इसके पश्चात रामजन्म भारती ने "हमारी तुम्हारी ना जोरी..." के माध्यम से होली के पारंपरिक रंगों को जीवंत किया।

त्रिवेणी द्विवेदी ने "मिथिला में राम खेलत होली" सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं राजकुमार विश्वकर्मा ने "हमार नऊंवा सुदामा जब सुन ले हरि..." गाकर भगवान कृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता का वृत्तांत सुनाया। रामनगीना व्यास, डॉ. दिवाकर सिंह और रमाशंकर राय समेत कई दिग्गज कलाकारों ने अपनी गायकी से कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए।

कवि सम्मेलन में हास्य और व्यंग्य की फुहार
संगीत के बाद शुरू हुए कवि सम्मेलन में रचनाकारों ने अपनी लेखनी से सामाजिक विडंबनाओं पर कड़ा प्रहार किया। कवि पाल बंधु की रचना "असो क होली शराब में डूब गइल" ने जहां शराबखोरी पर कटाक्ष किया, वहीं संतोष धुर्त की हास्य रचनाओं पर श्रोता ठहाके लगाने को मजबूर हो गए। हरिवंश सिंह 'बवाल' ने अपनी ओजपूर्ण पंक्तियों "जो कहता है किसी से दुश्मनी नहीं..." से दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। राजेश विश्वकर्मा, शिवदास अनपढ़ और मनीराम सैलाब जैसे कवियों ने भी अपनी कविताओं के माध्यम से वर्तमान परिवेश का सजीव चित्रण किया।

कलाकारों और अतिथियों का भव्य सम्मान
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित समाजसेवी संजय सिंह और विशिष्ट अतिथि नवल किशोर सिंह का आयोजन समिति द्वारा अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। इसके साथ ही कार्यक्रम में भाग लेने वाले सभी लोकगायकों और कवियों को भी उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए सम्मानित किया गया।

मुख्य अतिथि संजय सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि लोक संगीत और कवि सम्मेलन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं।

सफल संचालन और आभार प्रदर्शन
कार्यक्रम का कुशल संचालन सुभाष विश्वकर्मा ने किया, जबकि कवि मंच की कमान राजेश विश्वकर्मा ने संभाली। अंत में कार्यक्रम के मुख्य संयोजक गौरीशंकर सिंह ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सभी कलाकारों, अतिथियों और क्षेत्रीय जनता का हृदय से आभार व्यक्त किया। इस आयोजन में शहाबगंज और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।