सावित्रीबाई फुले महाविद्यालय में एक ही विषय में 90% छात्र फेल: धांधली की आशंका जता एसडीएम से जांच की मांग
चंदौली के चकिया स्थित सावित्रीबाई फुले राजकीय महाविद्यालय में बीए प्रथम वर्ष के एक विषय में 90% छात्र अनुत्तीर्ण हो गए। गुस्साए विद्यार्थियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर उत्तर पुस्तिकाओं की स्क्रूटिनी और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बीए प्रथम वर्ष रिजल्ट पर भारी बवाल
एक ही विषय में 90 फीसदी छात्र फेल
चकिया एसडीएम से निष्पक्ष जांच की मांग
उत्तर पुस्तिकाओं के स्क्रूटिनी की मांग
छात्रों के शैक्षणिक भविष्य पर बढ़ा संकट
चंदौली जिला अंतर्गत चकिया स्थित सावित्रीबाई फुले राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बुधवार को बीए प्रथम वर्ष के छात्र-छात्राओं का गुस्सा फूट पड़ा। हाल ही में घोषित हुए परीक्षा परिणाम में एक ही विषय में लगभग 90 प्रतिशत विद्यार्थियों के बैक (अनुत्तीर्ण) होने पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस अस्वाभाविक परिणाम से आक्रोशित छात्र-छात्राओं ने तहसील पहुंचकर उपजिलाधिकारी (एसडीएम) को एक सामूहिक शिकायत पत्र सौंपा।
विद्यार्थियों ने जताई भविष्य की चिंता, निष्पक्ष जांच की मांग
एसडीएम को सौंपे गए ज्ञापन में विद्यार्थियों ने बताया कि इतने बड़े पैमाने पर एक ही विषय में छात्रों का अनुत्तीर्ण होना बेहद असामान्य है। इससे सैकड़ों युवाओं का शैक्षणिक भविष्य अधर में लटक गया है। छात्रों का दावा है कि बीते वर्षों में भी इसी विषय में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के बैक आने का पैटर्न रहा है। इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी या मानवीय भूल को खारिज करने के लिए निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।
बिना आरोप लगाए केवल पारदर्शिता की अपील
विद्यार्थियों ने सामूहिक पत्र में स्पष्ट किया कि वे कॉलेज प्रशासन, विश्वविद्यालय, किसी शिक्षक या परीक्षक पर सीधे तौर पर कोई आरोप नहीं लगा रहे हैं। उनकी एकमात्र मांग है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और सच सामने आए। उन्होंने एसडीएम से अपील की कि उत्तर पुस्तिकाओं का नियमानुसार पुनर्मूल्यांकन या स्क्रूटिनी कराई जाए, ताकि किसी भी तकनीकी या मूल्यांकन संबंधी त्रुटि को समय रहते सुधारा जा सके।
गरीब परिवारों से आते हैं अधिकांश छात्र, प्रशासन से उम्मीद
ज्ञापन सौंपने पहुंचे अभ्यर्थियों ने कहा कि महाविद्यालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र सामान्य और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से ताल्लुक रखते हैं। एक विषय में बैक लग जाने से न केवल उनका एक साल बर्बाद होने का डर है, बल्कि उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी पड़ेगा। छात्रों ने उपजिलाधिकारी से मांग की है कि स्क्रूटिनी व पुनर्मूल्यांकन की समय-सीमा और प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी दी जाए ताकि वे समय रहते आवेदन कर सकें।