"कलम को किसी का गुलाम मत करना" – शहाबगंज के बड़गावां मुशायरे में गूंजे राष्ट्रीय एकता और सौहार्द के स्वर
चंदौली के शहाबगंज अंतर्गत बड़गावां गांव में आयोजित कौमी यकजहती मुशायरे में नामचीन शायरों ने शिरकत की। देश की गंगा-जमुनी तहजीब और कलम की ताकत को बयां करती रचनाओं से श्रोता देर रात तक मंत्रमुग्ध रहे।
बड़गावां में भव्य कौमी यकजहती मुशायरा
कन्वीनर कलाम बनारसी का शानदार स्वागत
गंगा-जमुनी तहजीब और भाईचारे का संदेश
समकालीन हालातों पर शायरों का तीखा कटाक्ष
अशफाक आबिद की अध्यक्षता में कार्यक्रम संपन्न
चंदौली जिले के शहाबगंज विकास खंड क्षेत्र अंतर्गत बड़गावां गांव में रविवार की देर शाम एक ऐतिहासिक साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। 'बज्मे इरफान अदब' के तत्वावधान में कौमी यकजहती (राष्ट्रीय एकता) को समर्पित इस भव्य मुशायरे और कवि सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए मशहूर शायरों और शायराओं ने शिरकत की। देश की गौरवशाली गंगा-जमुनी तहजीब, सामाजिक सौहार्द और आपसी भाईचारे के संदेश से सराबोर रचनाओं को सुनकर उपस्थित श्रोता देर रात तक मंत्रमुग्ध रहे।
"कलम को किसी का गुलाम मत करना" – कलाम बनारसी
कार्यक्रम के कन्वीनर (संयोजक) कलाम बनारसी ने मुशायरे में पहुंचे सभी अतिथि कलाकारों और साहित्यकारों का अंगवस्त्र व माल्यार्पण कर आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने समाज में साहित्य और कलम की वास्तविक ताकत को रेखांकित करते हुए अपनी मशहूर पंक्तियां पढ़ीं, जिसे सुनकर पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा:
"पिसर ने की बाबा ये काम मत करना, अमीरे शहर को झुककर सलाम मत करना।
कलम वकार है, रोटी के वास्ते हरगिज़, कलम को अपने किसी का गुलाम मत करना।"
समकालीन परिस्थितियों और मौजूदा हालातों पर शायरों का तीखा कटाक्ष
मुशायरे के मंच से समकालीन व्यवस्थाओं और सामाजिक हालातों पर शायरों ने जमकर शब्दों के तीर चलाए। महताब आलम खान ने व्यंग्य करते हुए पढ़ा, "प्यादे ने शहसवार के तोते उड़ा दिए।" वहीं, प्रयागराज (इलाहाबाद) से आए प्रख्यात शायर अनवार गौहर ने मौजूदा दौर पर गहरा कटाक्ष करते हुए पढ़ा, "न रंगी सुबह बाकी है, न दिलकश शाम बाकी है, लगे रहिए दलाली में, यही एक काम बाकी है।" इन शानदार प्रस्तुतियों की श्रोताओं ने मुक्तकंठ से सराहना की।
देश के नामचीन रचनाकारों की मौजूदगी में देर रात तक चला आयोजन
इस गरिमामयी महफिल में सिम्मी गाजीपुरी, शहजादी नूरी जौनपुरी, जकिया बाराबंकवी, अबु शहमा, रोशन मुगलसराई, उबैद अख्तर, डॉ. इरफान इकबाल, शकीर साहब और अफजल इलाहाबादी सहित अन्य कई नामचीन शायरों ने अपने बेहतरीन कलाम पेश किए। कार्यक्रम की अध्यक्षता अशफाक आबिद ने की तथा सफल संचालन इसराईल इशरत द्वारा किया गया।
आयोजन को सफल बनाने में जमील अहमद, अलाउद्दीन, सलाहुद्दीन, अलाउद्दीन कादरी, आफताब आलम, मिनहाज अहमद, अफसर अली, रईसुल, हाफिज तौफीक, इबरार, इमरान खान, आरिफ, हसनैन और साजिद सहित पूरी आयोजन समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अंत में सभी आगंतुकों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।