चंदौली से ट्रांसफर के बाद भी कुर्सी से चिपके हैं शहाबगंज BDO दिनेश सिंह; आखिर क्या है वजह?
तबादला सूची जारी होने के कई दिन बाद भी शहाबगंज के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) दिनेश कुमार सिंह ने प्रतापगढ़ में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। शासन के आदेशों की अनदेखी को लेकर प्रशासनिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं। पूरी खबर पढ़ें।
शहाबगंज बीडीओ दिनेश सिंह का प्रतापगढ़ हुआ तबादला
31 मई को जारी हुई थी स्थानांतरण सूची
तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश का नहीं हुआ पालन
शहाबगंज विकासखंड क्षेत्र में बीडीओ की कुर्सी पर सस्पेंस
जिला प्रशासन और ग्राम्य विकास विभाग पर टिकी निगाहें
चंदौली जिले के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक मामला खूब सुर्खियां बटोर रहा है। शहाबगंज के खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) दिनेश कुमार सिंह का तबादला हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन वे अब भी शहाबगंज में ही अंगद की तरह पैर जमाए बैठे हैं। शासन द्वारा ट्रांसफर आर्डर जारी होने के बावजूद उनका अब तक कार्यमुक्त न होना पूरे क्षेत्र में चर्चा और कौतूहल का विषय बन गया है।
31 मई को जारी हुई थी ट्रांसफर लिस्ट
आपको बता दें कि बीते 31 मई 2026 को शासन की तरफ से एक स्थानांतरण सूची जारी की गई थी। इस सूची में शहाबगंज बीडीओ दिनेश कुमार सिंह का तबादला जनपद प्रतापगढ़ के लिए किया गया था। विभागीय आदेश में यह साफ लिखा था कि उन्हें अपने नवीन तैनाती स्थल यानी प्रतापगढ़ में तत्काल प्रभाव से कार्यभार ग्रहण करना है। लेकिन इतने स्पष्ट आदेश के बाद भी बीडीओ साहब का शहाबगंज मोह खत्म नहीं हो पा रहा है।
जनता और जनप्रतिनिधियों ने उठाए सवाल
आम तौर पर जब भी शासन का कोई ट्रांसफर आर्डर आता है, तो अधिकारी तय समय के भीतर अपनी पुरानी जगह छोड़कर नई जिम्मेदारी संभालने चले जाते हैं। लेकिन इस मामले में हो रही देरी को लेकर अब स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि सरकारी आदेशों का समय पर पालन होना बेहद जरूरी है, वरना प्रशासनिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।
आखिर कुर्सी न छोड़ने की वजह क्या है?
शहाबगंज विकासखंड क्षेत्र में इस बात को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर प्रतापगढ़ ट्रांसफर होने के बावजूद बीडीओ दिनेश कुमार सिंह शहाबगंज में क्यों टिके हैं? क्या विभाग की तरफ से रिलीज करने की प्रक्रिया में कोई तकनीकी अड़चन है या फिर इसके पीछे कोई और बड़ी प्रशासनिक वजह है? इस सवाल का साफ जवाब अभी तक किसी के पास नहीं है। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन और ग्राम्य विकास विभाग पर हैं कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।