शहाबगंज में कागजों पर दौड़ रहे स्वच्छता के वाहन; कूड़ा ढोने के लिए आए ई-रिक्शा बने प्रधानों की 'दरवाजे की शोभा'
शहाबगंज विकासखंड की 72 ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था चौपट है। लाखों की लागत से खरीदे गए कूड़ा ढोने वाले ई-रिक्शा गांवों की सफाई करने के बजाय प्रधानों के घरों पर खड़े धूल फांक रहे हैं, जिससे ग्रामीण आक्रोशित हैं।
72 ग्राम पंचायतों में सफाई व्यवस्था बदहाल
कूड़ा ढोने वाले ई-रिक्शा हुए निष्क्रिय
प्रधानों के दरवाजे पर खड़े मिले वाहन
गांवों की गलियों में कचरे का अंबार
शहाबगंज में स्वच्छता मिशन की खुली पोल: सरकारी वाहन बने प्रधानों के दरवाजे की शोभा
चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड से स्वच्छता अभियान को लेकर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है। केंद्र और प्रदेश सरकार द्वारा 'स्वच्छ भारत मिशन' को धरातल पर उतारने के लिए विकासखंड की 72 ग्राम पंचायतों को कूड़ा ढोने वाले आधुनिक ई-रिक्शा वाहन उपलब्ध कराए गए थे। उद्देश्य था कि गांवों की गलियों से नियमित कचरा उठान हो सके और ग्रामीणों को शुद्ध वातावरण मिले। लेकिन वर्तमान में यह योजना भ्रष्टाचार और लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। अधिकांश पंचायतों में ये वाहन कूड़ा ढोने के बजाय ग्राम प्रधानों के आवास पर शोपीस बनकर खड़े हैं।
गंदगी के ढेर के बीच जीने को मजबूर ग्रामीण
बेलावर, ढोढ़नपुर, कलानी, बरियारपुर और कवलपुरवा माफी सहित दर्जनों गांवों की स्थिति बेहद दयनीय हो गई है। स्थानीय निवासी अशोक कुमार, मुन्ना और धर्मराज का आरोप है कि ई-रिक्शा मिलने के बाद भी गांवों में सफाई का स्तर रत्ती भर भी नहीं सुधरा है। सार्वजनिक स्थलों, मुख्य सड़कों और नालियों के किनारे कचरे के पहाड़ लगे हुए हैं। सफाई कर्मियों और वाहनों की निष्क्रियता के कारण उठने वाली दुर्गंध ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वच्छता का सपना केवल विज्ञापनों तक सिमट कर रह गया है, जबकि जमीनी हकीकत में बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है।
बिना चालक और रखरखाव के कबाड़ हो रहे वाहन
ई-रिक्शा के संचालन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ी खामियां उजागर हुई हैं। कई ग्राम पंचायतों में इन वाहनों को चलाने के लिए चालकों की तैनाती ही नहीं की गई है, तो कहीं चार्जिंग और रखरखाव के अभाव में वाहन खराब होने लगे हैं। चर्चा तो यह भी है कि कुछ पंचायतों में इन सरकारी वाहनों का उपयोग कूड़ा ढोने के बजाय निजी कार्यों में किया जा रहा है। सरकारी धन से खरीदे गए इन संसाधनों का ऐसा दुरुपयोग सीधे तौर पर जिला पंचायत राज विभाग की निगरानी प्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है।
अधिकारियों की जांच का आश्वासन और ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने अब ब्लॉक प्रशासन और जिला पंचायत राज विभाग से आर-पार की मांग की है। उनका कहना है कि ई-रिक्शा के संचालन की नियमित निगरानी की जाए और जो भी प्रधान या सचिव इसके दोषी हैं, उन पर कड़ी कार्रवाई हो। इस संबंध में खंड विकास अधिकारी (BDO) दिनेश सिंह ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि ई-रिक्शा वाहनों का उपयोग सार्वजनिक सफाई के लिए नहीं हो रहा है, तो इसकी विस्तृत जांच कराई जाएगी। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है।