करईल क्षेत्र में बाढ़ का प्रकोप: खिलची ड्रेन ओवरफ्लो होने से हजारों बीघे फसल डूबी, शहाबगंज में बारिश बनी आफत

 

चंदौली के शहाबगंज क्षेत्र में लगातार बारिश से भयंकर जलभराव हो गया है। खिलची ड्रेन की अधूरी सफाई के कारण पानी खेतों में भर गया है, जिससे हजारों बीघे फसल बर्बाद होने की कगार पर है।

 
 

करईल क्षेत्र के दर्जनों गांव जलमग्न

खिलची ड्रेन ओवरफ्लो से फसलों को खतरा

बंधी डिवीजन की लापरवाही पर उठे सवाल

केरायगांव रेगुलेटर का खुला जाम गेट

तटबंधों को ऊंचा करने की उठी मांग

चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों से हो रही रुक-रुक कर भारी बारिश आफत बन गई है। करईल क्षेत्र के दर्जनों गांवों में इस वक्त भयंकर जलभराव की स्थिति बनी हुई है। खिलची, घोड़सारी, बरियारपुर, इमिलिया, हड़ौरा, पस्थुआं, जिगिना, कवलपुरवां और रजडीहां जैसे गांवों के खेतों में कई फीट पानी भर गया है, जिससे हजारों बीघे फसल डूब चुकी है।

ड्रेन की अधूरी सफाई बनी तबाही की वजह
किसान विकास मंच के संगठन मंत्री रामअवध सिंह ने बताया कि सीहर, बेन, लेहरा, बिशुनपुरवां, कलानी, धनरियां और नेनवां का पानी खिलची ड्रेन में आता है। इस साल बंधी डिवीजन ने ड्रेन की सफाई तो कराई, लेकिन नीचे की ओर करीब ढाई किलोमीटर का हिस्सा साफ नहीं किया गया। वहां झाड़-झंखाड़ और मिट्टी जमा होने के कारण पानी की निकासी पूरी तरह ठप हो गई है।

कमजोर तटबंधों के चलते खेतों में फैला पानी
ग्रामीणों का कहना है कि ड्रेन के दोनों किनारों के तटबंध पर्याप्त ऊंचे नहीं हैं। जब पीछे से पानी का दबाव बढ़ा, तो ड्रेन का पानी ओवरफ्लो होकर सीधे किसानों के खेतों में फैल गया। इसके अलावा घोड़सारी, इमिलिया, पहाड़पुर, मसोई और केरायगांव में भी हालात काफी गंभीर हैं। स्थिति को देखते हुए बंधी डिवीजन और ग्रामीणों की मदद से केरायगांव रेगुलेटर का जाम गेट खुलवाया गया है।

स्थायी समाधान के लिए अधिकारियों से अपील
जलभराव की इस गंभीर समस्या को लेकर किसान विकास मंच ने बंधी डिवीजन के अधिकारियों के साथ-साथ स्थानीय ग्राम प्रधानों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और जिला पंचायत प्रतिनिधियों से मिलकर इस समस्या का पक्का इलाज खोजने की अपील की है।

किसानों ने की तटबंध ऊंचे करने की मांग
संगठन के जयनाथ सिंह, रामअवध सिंह, पारसनाथ, नीरज कुमार और संजय सिंह सहित कई अन्य लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ड्रेन के बचे हुए हिस्से की तुरंत सफाई कराई जाए। साथ ही ड्रेन के तटबंधों को ऊंचा और मजबूत बनाया जाए ताकि हर साल किसानों की मेहनत पानी में न बहे।