बारिश के बाद बाढ़ जैसे हालात: छत पर रात गुजारने को मजबूर बनवासी, BDO साहब रास्ता और जलनिकासी तो बनवा दीजिए!
चंदौली के शहाबगंज स्थित करईल क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के तीसरे दिन भी बाढ़ जैसे हालात हैं। धान की फसलें जलमग्न हो गई हैं, वहीं पस्तुआ गांव के बनवासी परिवार चारों तरफ पानी से घिरकर छतों पर रात काटने को मजबूर हैं।
करईल क्षेत्र के सिवान में जलभराव
धान की फसलें डूबने से बढ़ा खतरा
पस्तुआ में पानी से घिरे बनवासी
बारिश में छतों पर गुजरी रात
शहाबगंज में जलनिकासी और रास्ते की मांग
चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड अंतर्गत आने वाले करईल क्षेत्र में गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश का असर तीसरे दिन शनिवार को भी देखने को मिल रहा है। बरांव, इमलिया और पचपरा गांव के सिवान में बारिश का पानी भर जाने से कई एकड़ में रोपी गई धान की फसलें पूरी तरह डूब चुकी हैं। खेतों में लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण अब धान के छोटे पौधों के सड़कर नष्ट होने का खतरा बढ़ गया है।
चारों तरफ पानी से घिरे बनवासी परिवार, छतों पर बिता रहे रात
फसलों के साथ-साथ ग्रामीणों की जिंदगी पर भी बारिश का बुरा असर पड़ा है। ग्राम पंचायत पचपरा के पस्तुआ गांव के सिवान में बसे बनवासी परिवार पूरी तरह जलभराव की चपेट में आ चुके हैं। उनके घरों के चारों तरफ पानी भरा हुआ है, जिससे बाहर निकलने का कोई सूखा रास्ता नहीं बचा है। छोटे-छोटे बच्चों के साथ परिवार के लोग किसी तरह पानी के बीच से आवागमन करने को मजबूर हैं।
गांव के राजेंद्र, झेंगट और मेलाही ने बताया कि करीब तीन साल पहले उन्हें आबादी की जमीन पर सरकारी आवास मिला था। मकान तो बन गया, लेकिन रास्ते और जलनिकासी की कोई व्यवस्था नहीं की गई। जब तेज बारिश होती है, तो पानी घरों के अंदर घुस जाता है। ऐसे में बच्चों की जान बचाने के लिए उन्हें पूरी रात छत पर चढ़कर गुजारनी पड़ती है।
रास्ता और हैंडपंप न होने से पेयजल का भारी संकट
जलभराव की वजह से घरों में रखा राशन और खाद्यान्न खराब हो रहा है। इसके अलावा बस्ती में हैंडपंप न होने के कारण पीने के पानी की गंभीर किल्लत हो गई है। ग्रामीणों को करीब 500 मीटर दूर से पीने का पानी लाना पड़ता है, लेकिन रास्ते में लबालब पानी भरा होने के कारण पानी लाना भी बेहद खतरनाक साबित हो रहा है।
आवास मिला पर सुविधाएं गायब, ढिबरी के सहारे जिंदगी
पीड़ित बनवासियों का कहना है कि सरकार की योजना के तहत उन्हें मकान तो दे दिया गया, लेकिन शौचालय, हैंडपंप, बिजली और पक्के रास्ते जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं दी गईं। आज भी लोग ढिबरी के उजाले में रहने को मजबूर हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने जलनिकासी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर ग्राम प्रधान से लेकर ब्लॉक स्तर के अधिकारियों तक गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द से जल्द पानी की निकासी कराने और रास्ते व बिजली-पानी का इंतजाम करने की मांग की है।