शहाबगंज में प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा: 6 माह से टूटा है मुसाखाड़ रपटा, ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर दी आंदोलन की चेतावनी

 

चंदौली के मुसाखाड़ गांव को ब्लॉक मुख्यालय से जोड़ने वाला महत्वपूर्ण रपटा पिछले छह महीनों से क्षतिग्रस्त पड़ा है। सिंचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी की लापरवाही से नाराज ग्रामीणों ने शनिवार को जोरदार प्रदर्शन कर जल्द मरम्मत की मांग उठाई है।

 
 

मुसाखाड़ गांव को जोड़ने वाला मुख्य रपटा 6 माह से बदहाल

बांध के पानी के तेज बहाव में बह गया था रपटा

सिंचाई विभाग और पीडब्ल्यूडी की टालमटोल से ग्रामीण परेशान

स्कूली बच्चों और मरीजों को आवागमन में हो रही भारी दिक्कत

ग्रामीणों ने दी उग्र आंदोलन और प्रदर्शन की चेतावनी

चंदौली जिले के शहाबगंज  विकास खंड मुख्यालय शहाबगंज को मुसाखाड़ गांव से जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग पिछले छह महीनों से अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। बांध से छोड़े गए पानी के तेज बहाव में क्षतिग्रस्त हुआ रपटा आज तक मरम्मत की राह देख रहा है। विभाग की इस घोर अनदेखी से क्षुब्ध होकर शनिवार को ग्रामीणों ने रपटे के पास जमा होकर विरोध प्रदर्शन किया और जमकर नारेबाजी की।

छह माह से दुर्घटनाओं को दावत दे रहा क्षतिग्रस्त मार्ग
ग्रामीण चन्दन सेठ, प्रमोद कुमार और पप्पू ने बताया कि करीब छह महीने पहले बांध से छोड़े गए पानी के दबाव के कारण यह रपटा बुरी तरह टूट गया था। रास्ता पूरी तरह उबड़-खाबड़ हो चुका है, जिससे आए दिन दोपहिया और साइकिल सवार गिरकर चोटिल हो रहे हैं। यह मार्ग मुसाखाड़ और आसपास की अन्य बस्तियों के लिए ब्लॉक मुख्यालय तक पहुंचने का एकमात्र सुगम रास्ता है, जिसके बंद होने से हजारों की आबादी प्रभावित है।

जिम्मेदारी से भाग रहे विभाग, जनता बेहाल
प्रदर्शनकारी ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि इस समस्या के समाधान के लिए कई बार गुहार लगाई गई, लेकिन सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) अपनी जिम्मेदारी एक-दूसरे पर थोप रहे हैं। कमलेश यादव और पांचू बनवासी ने कहा कि विभागों की इस आपसी खींचतान में आम जनता पिस रही है। अधिकारियों की संवेदनहीनता के कारण रात के समय यहाँ से गुजरना किसी खतरे से कम नहीं है।

स्कूली बच्चों और मरीजों के लिए बना काल
रपटा क्षतिग्रस्त होने का सबसे बुरा असर शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि खराब रास्ते के कारण गांव में एंबुलेंस आने में देरी होती है, जिससे आपातकालीन स्थिति में मरीजों की जान पर बन आती है। वहीं, स्कूली बच्चों को हर रोज जान जोखिम में डालकर उबड़-खाबड़ रास्ते से गुजरना पड़ता है।

आंदोलन की चेतावनी
शनिवार को प्रदर्शन करने वालों में फेरु, सतीश प्रसाद, कमलेश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल रहे। ग्रामीणों ने दोटूक शब्दों में प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराया गया, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।