चकिया के लाल ने रचा इतिहास: दक्षिण अफ्रीका से ट्रेनिंग कर इंडिगो एयरलाइन में पायलट बने शांतम सिंह

सपनों को पंख देने की कहानी! चंदौली के चकिया निवासी शांतम सिंह ने दक्षिण अफ्रीका में कठिन ट्रेनिंग पूरी कर इंडिगो एयरलाइन में पायलट ऑफिसर बनकर जिले का नाम रोशन किया है। जानिए उनके संघर्ष और सफलता का सफर।

 

दक्षिण अफ्रीका के लेंसेरिया से पायलट ट्रेनिंग

इंडिगो एयरलाइन में पायलट ऑफिसर नियुक्त

चकिया के प्रतिष्ठित परिवार का गौरव बढ़ा

युवाओं के लिए बने प्रेरणा के स्रोत

विपरीत हालातों को हराकर छुई ऊंचाई

चंदौली जनपद चंदौली के चकिया क्षेत्र के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। जहाँ कभी संसाधनों की कमी सपनों के आड़े आती थी, आज वहीं के युवाओं ने साबित कर दिया है कि यदि इरादे फौलादी हों तो आसमान भी छोटा पड़ जाता है। SRVS के डिप्टी डायरेक्टर श्याम जी सिंह के सुपुत्र और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष छत्रबलि सिंह के भतीजे शांतम सिंह ने इंडिगो (IndiGo) जैसी प्रतिष्ठित एयरलाइन में पायलट ऑफिसर बनकर पूरे जनपद को गौरवान्वित किया है।

सात समंदर पार से शुरू हुआ आसमान का सफर
शांतम सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद अपने जुनून को हकीकत में बदलने के लिए सात समंदर पार का रुख किया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के सुप्रसिद्ध 'लेंसेरिया फ्लाइट सेंटर' (Lanseria Flight Centre) से अपनी प्रोफेशनल पायलट ट्रेनिंग हासिल की। यह संस्थान अपने विश्वस्तरीय मानकों और कठोर अनुशासन के लिए जाना जाता है। एक नए देश में नया माहौल, अलग भाषा और हर दिन कठिन प्रशिक्षण की चुनौतियों को शांतम ने अपनी ताकत बनाया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खुद को साबित किया।

संघर्ष और समर्पण की मिसाल
यह सफलता केवल एक नौकरी का मिलना नहीं, बल्कि उन अनगिनत रातों की तपस्या है जब शांतम अपने लक्ष्य के लिए जागते रहे। दक्षिण अफ्रीका की कड़कती ठंड और तकनीकी परीक्षाओं के दबाव के बीच उन्होंने कभी हार नहीं मानी। उनके परिवार, विशेषकर पिता श्याम जी सिंह के मार्गदर्शन और अटूट विश्वास ने उन्हें वह मानसिक मजबूती दी, जिसकी बदौलत आज वे कॉकपिट में बैठकर देश सेवा के लिए तैयार हैं।

पूरे क्षेत्र में जश्न का माहौल
शांतम के चयन की खबर जैसे ही चकिया और आसपास के गांवों में पहुंची, हर तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व विधायक मनोज सिंह डब्लू की बेटी के बाद अब शांतम ने यह मुकाम पाकर यह साबित कर दिया है कि चंदौली की प्रतिभा अब वैश्विक पटल पर चमक रही है। बुजुर्गों की आँखों में गर्व के आँसू हैं तो वहीं युवाओं में एक नया जोश देखने को मिल रहा है।

युवाओं के लिए प्रेरणा का संदेश
आज के डिजिटल युग में, जहाँ युवा अक्सर दिशा की तलाश में रहते हैं, शांतम सिंह की कहानी एक स्पष्ट संदेश देती है— "बड़ा सपना देखो, कड़ी मेहनत करो और अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखो।" उनकी यह उपलब्धि केवल एक परिवार का गौरव नहीं, बल्कि चंदौली के हर उस बच्चे की जीत है जो अभावों के बावजूद ऊँचे सपने देखता है।

शांतम की सफलता यह बताती है कि ग्रामीण पृष्ठभूमि का होना आपकी कमजोरी नहीं, बल्कि आपकी सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। अब चंदौली का हर बच्चा गर्व से कह सकेगा— "हाँ, मैं भी पायलट बन सकता हूँ।"