चकिया के खरौझा में श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग सुन भावुक हुए श्रद्धालु, श्रीराम कथा में उमड़ी भारी भीड़

चंदौली के खरौझा गांव में आयोजित नौ दिवसीय श्रीराम कथा के पांचवें दिन कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग का जीवंत वर्णन कर श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।

 

खरौझा के प्राचीन हनुमान मंदिर में श्रीराम कथा का आयोजन

विवाह प्रसंग से दो कुलों की जिम्मेदारियों का होता है बोध

प्रभु श्रीराम ने सभी को उनके भाव के अनुरूप दर्शन दिए

पहले सिद्ध नहीं, बल्कि शुद्ध बनने की दी गई प्रेरणा

कथा के समापन पर निकाली गई सजीव और आकर्षक झांकी

चंदौली जिले की चकिया तहसील क्षेत्र अंतर्गत खरौझा गांव के हिनौती मौजा स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर परिसर में धार्मिक उत्साह चरम पर है। हनुमान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित की जा रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के पांचवें दिन गुरुवार की रात श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्य कथा व्यास और सुप्रसिद्ध कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने श्रीराम-सीता विवाह प्रसंग का अत्यंत भावपूर्ण एवं मनोहारी वर्णन करते हुए पांडाल में उपस्थित सैकड़ों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो कुलों का मिलन
कथावाचिका शालिनी त्रिपाठी ने विवाह प्रसंग पर विशेष प्रकाश डालते हुए कहा कि विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो कुलों का पवित्र मिलन होता है। इससे व्यक्ति को अपने सामाजिक कर्तव्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों का गहरा बोध होता है। उन्होंने श्रीराम के जनकपुर आगमन, धनुष यज्ञ और पुष्प वाटिका प्रसंग का अत्यंत जीवंत चित्रण किया। उन्होंने बताया कि प्रभु श्रीराम ने जनकपुर में सभी को उनके भाव के अनुसार दर्शन दिए—ऋषियों को ब्रह्म स्वरूप में, राजाओं को राजकुमार के रूप में और प्रेमियों को प्रेममय रूप में। यह दर्शाता है कि ईश्वर की प्राप्ति व्यक्ति की भावना और सच्ची भक्ति पर ही निर्भर करती है।

सिद्ध होने से पहले मन और हृदय को शुद्ध बनाएं
शालिनी त्रिपाठी ने आधुनिक जीवन शैली और भौतिकता पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज के समय में लोग मोबाइल और अन्य सुखों के लिए समय निकाल लेते हैं, लेकिन भजन-कीर्तन को टालते रहते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन का कोई भरोसा नहीं है, इसलिए समय रहते भगवान का स्मरण करना आवश्यक है। कथावाचिका ने 'पहले सिद्ध नहीं, शुद्ध बनिए' का मूलमंत्र देते हुए कहा कि जब मनुष्य का मन, बुद्धि और हृदय पूरी तरह शुद्ध हो जाते हैं, तब भगवान उसे स्वयं सुलभ हो जाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने समाज में बेटियों के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि बेटियां परिवार की मर्यादा और संस्कारों की प्रतीक होती हैं।

आकर्षक झांकी ने मोहा भक्तों का मन
कथा के समापन अवसर पर भगवान श्रीराम, लक्ष्मण, माता सीता, राजा दशरथ, गुरु विश्वामित्र एवं द्वारपालों की अत्यंत आकर्षक और सजीव झांकी प्रस्तुत की गई। झांकी के दर्शन कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे और पूरा परिसर 'जय श्रीराम' के उद्घोष से गूंज उठा। इस मांगलिक अवसर पर ग्राम प्रधान राजन सिंह, राधेश्याम द्विवेदी, अजय सिंह, जयप्रकाश शर्मा, मालिक चौबे, आदित्य पांडेय, लल्ला गिरी, प्रियंका सिंह, रोली सिंह, रूद्र प्रिया सिंह और आकांक्षा चौबे सहित क्षेत्र के सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।