उसरी के भगत सिंह पार्क में किसान पंचायत का आयोजन, हक और रोजगार के लिए एकजुट होने का दिया संदेश
चंदौली के उसरी गांव में किसान पंचायत के जरिए शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती मनाई गई। वक्ताओं ने किसानों, मजदूरों और युवाओं के अधिकारों की आवाज उठाते हुए 2 अक्टूबर से चकिया में अनिश्चितकालीन धरने का ऐलान किया।
उसरी में किसान पंचायत का भव्य आयोजन
शहीद-ए-आजम भगत सिंह को दी श्रद्धांजलि
किसानों और मजदूरों की एकजुटता पर जोर
चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग
2 अक्टूबर से चकिया में अनिश्चितकालीन धरना
चंदौली जिले के शहाबगंज विकासखंड स्थित उसरी गांव में सोमवार का दिन खास रहा। गांव के नवनिर्मित भगत सिंह पार्क में शहीद-ए-आजम भगत सिंह की जयंती बेहद अनोखे अंदाज में किसान पंचायत का आयोजन करके मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत पार्क में स्थापित भगत सिंह की प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित करके हुई। इसके बाद रामनिवास पांडेय की अध्यक्षता में किसान पंचायत विधिवत शुरू हुई, जिसमें किसानों, मजदूरों, युवाओं और महिलाओं की समस्याओं पर खुलकर बात हुई।
भगत सिंह के सपनों के भारत पर हुई चर्चा
पंचायत को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह का सपना केवल अंग्रेजों को देश से बाहर निकालना नहीं था। वे एक ऐसे भारत का निर्माण करना चाहते थे जहां किसान, मजदूर और महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक बराबरी का अधिकार मिले। वक्ताओं ने अफसोस जताते हुए कहा कि आजादी के इतने दशकों बाद भी देश में आर्थिक असमानता बनी हुई है। एक तरफ चंद पूंजीपतियों के पास बेशुमार धन-दौलत जमा हो रही है, वहीं दूसरी तरफ आम इंसान अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहा है।
बुनियादी सुविधाओं के निजीकरण पर उठाए सवाल
किसान पंचायत में केंद्र सरकार की नीतियों की कड़े शब्दों में आलोचना की गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि जल, जंगल, जमीन, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को बड़े पूंजीपतियों के हवाले किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन सरकारी संपत्तियों के निजीकरण का सीधा असर आम किसानों, गरीबों और मजदूरों की जेब पर पड़ रहा है। इसके साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं के गलत इस्तेमाल पर भी गहरी चिंता जताई गई।
रोजगार, पेपर लीक और एकजुटता का मुद्दा
पंचायत में युवाओं के भविष्य और प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे पेपर लीक का मुद्दा भी गरमाया। वक्ताओं ने कहा कि आज देश की युवा शक्ति परेशान है और उनकी प्रतिभा का सही इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। सभी वक्ताओं ने किसानों और युवाओं से अपील की कि वे जाति और धर्म की दीवारों को तोड़कर एक साथ आएं। अपनी खेती, जमीन और रोजी-रोटी को बचाने के लिए संगठित होकर लड़ना ही एकमात्र रास्ता बचा है।
चुनाव आयुक्त से इस्तीफे की मांग और चकिया धरने का ऐलान
पंचायत के अंत में एक अहम प्रस्ताव पास कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की गई। इसके साथ ही आगामी 2 अक्टूबर से चकिया में शुरू होने जा रहे किसानों के अनिश्चितकालीन धरने को सफल बनाने की अपील की गई।
कार्यक्रम में पूर्व विधायक पूनम सोनकर, जितेंद्र प्रसाद एडवोकेट, किसान सभा के नेता शंभूनाथ यादव, जिलाध्यक्ष परमानंद मौर्य, महिला नेत्री लालमनी विश्वकर्मा, सीपी खरवार, प्रियानंद पांडेय, प्रभुनारायण यादव, दशरथ सोनकर, राजेंद्र यादव, लालचंद सिंह एडवोकेट, लालजी मौर्य, अरुण यादव, गीता देवी, रामलाल, अश्वनी सोनकर और मृत्युंजय पांडेय समेत बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण और किसान उपस्थित रहे।