वीर अब्दुल हमीद शहादत दिवस पर पूर्व विधायक ने युवाओं से किया प्रेरणा लेने का आह्वान
शहाबगंज कस्बे में शहीद के सम्मान में आयोजन
पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट ने की शिरकत
कहा-शहीद अब्दुल हमीद का बलिदान राष्ट्र की अखंडता का प्रतीक
चंदौली जिले में शहाबगंज कस्बे में बुधवार को वीर अब्दुल हमीद शहादत दिवस को पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक परमवीर चक्र विजेता शहीद वीर अब्दुल हमीद के अदम्य साहस और शौर्य को याद किया। इस दौरान क्षेत्र के पूर्व सैनिकों को भी सम्मानित किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए पूर्व विधायक जितेंद्र कुमार एडवोकेट ने कहा कि शहीद वीर अब्दुल हमीद केवल एक गांव या क्षेत्र के नहीं, बल्कि पूरे देश के गौरव हैं। उन्होंने कहा, "वीर अब्दुल हमीद का बलिदान राष्ट्र की अस्मिता और अखंडता की रक्षा का प्रतीक है।" 1965 के युद्ध में अपनी जान की परवाह न करते हुए उन्होंने दुश्मन के दांत खट्टे कर दिए थे। उनके अद्वितीय पराक्रम के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च वीरता सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।
जितेंद्र कुमार ने युवाओं से अपील की कि वे शहीद के शौर्य और त्याग से प्रेरणा लेकर देश और समाज के लिए हमेशा तैयार रहें। उन्होंने कहा कि वीर अब्दुल हमीद ने यह साबित कर दिया कि साहस और संकल्प के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती। आज के युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान देना चाहिए।
सरकारी स्तर पर शहीद दिवस मनाने की मांग
अनिल मिश्र ने कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और राष्ट्र नायकों के योगदान को सरकारी स्तर पर याद किया जाता है, उसी तरह वीर अब्दुल हमीद दिवस को भी राष्ट्रीय स्तर पर सरकारी आयोजन के रूप में मनाया जाना चाहिए। ऐसा करने से आने वाली पीढ़ियां उनके शौर्य और बलिदान से प्रेरणा ले सकेंगी। सभा में मौजूद लोगों ने भी सरकार से यही मांग की कि शहीद दिवस को सरकारी स्तर पर आयोजित कर वीर अब्दुल हमीद को सच्ची श्रद्धांजलि दी जाए।
पूर्व सैनिकों का सम्मान
इस अवसर पर, वीर अब्दुल हमीद के बलिदान को याद करने के साथ-साथ क्षेत्र के पूर्व सैनिकों का भी सम्मान किया गया। उन्हें अंग वस्त्र और माला पहनाकर उनके योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया। सभा में मौजूद सभी लोगों ने शहीद के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अनिल मिश्र ने की, जबकि संचालन महमूद आलम ने किया। इस दौरान प्रधान बदरुद्दोजा अंसारी, दशरथ सोनकर, मुस्ताक खां, अशफाक अहमद, हाजी मुस्लिम, रजवंत फौजी, नईम अख्तर और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।