कभी प्राथमिक विद्यालय डूमरी को देख आइए BSA साहब, कैसे चल रही है कायाकल्प योजना
प्राथमिक विद्यालय डूमरी में जलभराव से हो रही है परेशानी
बच्चों का पठन-पाठन हो रहा है बाधित
कायाकल्प योजना पर उठने लगे हैं सवाल
चंदौली जिले के शहाबगंज विकास क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालय डूमरी की स्थिति इन दिनों अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है। विद्यालय परिसर में चारों ओर फैले जलभराव ने बच्चों की पढ़ाई को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रवेश द्वार से लेकर कक्षाओं तक कीचड़ और गंदा पानी फैला हुआ है, जिससे नौनिहालों को रोज़ाना संक्रमण के खतरे के बीच से होकर गुजरना पड़ता है। यह दृश्य न केवल शिक्षा व्यवस्था की बदहाली को उजागर करता है, बल्कि कायाकल्प योजना की विफलता पर भी सवाल खड़े करता है।
प्रधानाध्यापक अशोक प्रजापति ने बताया कि जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। उन्होंने विभागीय अधिकारियों और ग्राम प्रधान को कई बार लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। नतीजा यह है कि बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है और अभिभावक भी बच्चों को विद्यालय भेजने से हिचकिचा रहे हैं।
ग्राम प्रधान संतोष गोंड पर भी उदासीनता के आरोप लग रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान को समस्या की पूरी जानकारी है, बावजूद इसके उन्होंने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया। कायाकल्प योजना के तहत विद्यालयों को साफ-सुथरा और सुविधाजनक बनाने का दावा किया गया था, लेकिन डूमरी प्राथमिक विद्यालय की टूटी दीवारें, जलजमाव और गंदगी इस योजना की असलियत बयां कर रही हैं।
अभिभावकों ने चिंता जताई कि बरसात के मौसम में मच्छरों की भरमार हो गई है, जिससे डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। बच्चों को इस स्थिति में विद्यालय भेजना उनके स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है। शिक्षक भी परेशान हैं, क्योंकि गंदगी और बदबू के बीच पढ़ाई सुचारू रूप से नहीं हो पा रही।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बच्चों का भविष्य दांव पर है और जिम्मेदार अधिकारी व जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए हैं।
इस संबंध में खंड शिक्षाधिकारी अजय कुमार ने बताया कि विद्यालय में जलभराव की जानकारी उच्चाधिकारियों को दे दी गई है और शीघ्र ही समस्या का समाधान किया जाएगा। हालांकि, जब तक ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य दोनों खतरे में बने रहेंगे।
यह मामला न केवल एक विद्यालय की दुर्दशा का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि योजनाओं की सफलता केवल कागजों तक सीमित रह जाए तो उसका असर सबसे पहले बच्चों के भविष्य पर पड़ता है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और कब डूमरी के नौनिहालों को एक सुरक्षित और स्वच्छ शैक्षणिक वातावरण मिल पाता है।