चकिया में गूँजे नेताजी और भगत सिंह के विचार, 129वीं जयंती पर जन विमर्श और कवि गोष्ठी का भव्य आयोजन

 

आदित्य नारायण पुस्तकालय चकिया में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती पर 'भारत का सांस्कृतिक मंच' ने वैचारिक विमर्श और कवि गोष्ठी आयोजित की। वक्ताओं ने साम्राज्यवादी शक्तियों के विरुद्ध क्रांतिकारी चेतना को जगाने का आह्वान किया।

 
 

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती का उत्सव

साम्राज्यवादी शक्तियों के खिलाफ एकजुटता का आह्वान

क्रांतिकारी विचारों और देशभक्ति कविताओं का संगम

शहीद भगत सिंह विचार मंच की सक्रिय भागीदारी

राष्ट्र निर्माण में युवा पीढ़ी की भूमिका पर मंथन

चंदौली जनपद के चकिया स्थित ऐतिहासिक आदित्य नारायण पुस्तकालय परिसर में गुरुवार को 'भारत का सांस्कृतिक मंच' के तत्वावधान में महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती गौरवपूर्ण ढंग से मनाई गई। इस अवसर पर जन विमर्श एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें वक्ताओं ने नेताजी और शहीद-ए-आजम भगत सिंह के बलिदानों को याद करते हुए वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य पर गंभीर चर्चा की।

क्रांतिकारी नायकों को श्रद्धांजलि और कार्यक्रम का उद्घाटन
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ नेताजी सुभाष चंद्र बोस और शहीद भगत सिंह के चित्रों पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। उद्घाटन करते हुए 'शहीद-ए-आजम भगत सिंह विचार मंच' के वरिष्ठ कार्यकर्ता कॉमरेड श्याम बिहारी सिंह ने वैश्विक परिस्थितियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज जब वैश्विक साम्राज्यवाद विकासशील देशों पर अपना वर्चस्व थोपने की कोशिश कर रहा है, तब दक्षिण एशियाई देशों को समाजवादी और जनपक्षधर दृष्टिकोण अपनाने की सख्त जरूरत है।

स्वतंत्रता संग्राम और संगठित शक्ति पर विमर्श
विमर्श के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि भारत की स्वाधीनता केवल समझौतों का परिणाम नहीं थी, बल्कि यह लाखों भारतीयों की संगठित शक्ति, सतत संघर्ष और अभूतपूर्व बलिदान का फल थी। 'भारत का सांस्कृतिक मंच' के सदस्यों ने कहा कि उनका संगठन नेताजी और भगत सिंह के उन सपनों को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो एक न्यायपूर्ण और शोषणमुक्त समाज की कल्पना करते थे। इस दौरान डॉ. मिश्रीलाल, अजय राय, और सुदामा पांडेय सहित कई प्रबुद्धजनों ने राष्ट्र निर्माण में वैचारिक स्पष्टता को अनिवार्य बताया।

देशभक्ति से ओत-प्रोत कवि गोष्ठी और सम्मान
सांस्कृतिक सत्र में कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय और क्षेत्रीय कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक न्याय, जनसंघर्ष और राष्ट्रप्रेम का संदेश दिया। कविताओं ने श्रोताओं में जोश और नई चेतना का संचार किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रश्याम झारखंडी और संचालन वरिष्ठ साहित्यकार समीम अहमद ने किया। आयोजन के अंत में सभी कवियों और प्रमुख वक्ताओं को उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में पूनम भारती, धर्मेंद्र अहमद और जगजीवन लाल सहित भारी संख्या में साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।