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Pitta Dosha Diet: पित्त की बीमारी से परेशान लोगों के लिए घरेलू डाइट चार्ट, जानें क्या खाएं और क्या नहीं.?

शरीर में बढ़ी हुई गर्मी, जल्दी गुस्सा आना और पसीना पित्त दोष के लक्षण हैं। आयुर्वेद के अनुसार सही अनाज, फल और जीवनशैली के चुनाव से आप पित्त को संतुलित कर एक स्वस्थ और शीतल जीवन जी सकते हैं।

 
 

जौ, चावल और गेहूं का सेवन पित्त शांत करने में सहायक

ठंडी तासीर वाले मीठे फल जैसे अंजीर और सेब हैं गुणकारी

सब्जियों में खीरा, करेला और परवल पहुंचाते हैं शरीर को ठंडक

हींग, काली मिर्च और तीखे मसालों से परहेज करना है जरूरी

तनाव कम करने के लिए संगीत और प्रकृति के करीब समय बिताएं

आयुर्वेद के अनुसार, हमारे शरीर का संतुलन वात, पित्त और कफ पर टिका होता है। इनमें से पित्त प्रकृति वाले लोग अक्सर शरीर में अत्यधिक गर्मी महसूस करते हैं। ऐसे व्यक्तियों को न केवल जल्दी पसीना आता है, बल्कि वे स्वभाव से थोड़े उग्र या जल्दी गुस्सा होने वाले भी होते हैं। यदि आपकी प्रकृति भी पित्त प्रधान है, तो स्वास्थ्य को संतुलित रखने के लिए आपको अपने आहार और जीवनशैली में विशेष बदलाव करने की आवश्यकता है।

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अनाज और दालों का सही चुनाव
पित्त को संतुलित रखने के लिए हल्के और पोषक अनाज का सेवन सबसे उत्तम माना जाता है। अपने दैनिक भोजन में जौ, चावल और गेहूं को प्राथमिकता दें। ये शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के साथ-साथ भीतरी गर्मी को कम करने में मदद करते हैं। हालांकि, दालों के मामले में सावधानी बरतें। उड़द की दाल और कुलथी जैसी भारी या गर्म तासीर वाली दालों से परहेज करना चाहिए, क्योंकि ये पित्त को और अधिक भड़का सकती हैं।

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फल और सब्जियों में क्या है खास?
पित्त प्रकृति वालों के लिए मीठे और शीतल फल अमृत के समान हैं। सेब, नाशपाती, अंजीर, किशमिश और आंवला जैसे फलों का सेवन शरीर को भीतर से राहत पहुंचाता है। खट्टे फलों और करौंदा जैसी चीजों से दूरी बनाना ही बेहतर है।

सब्जियों की बात करें तो मीठे और कड़वे स्वाद वाली सब्जियां पित्त को नियंत्रित करती हैं। खीरा, करेला, मटर, परवल और शतावरी आपके शरीर के तापमान को सामान्य बनाए रखने में सहायक हैं। वहीं, बैंगन, कच्चा प्याज, लहसुन, गाजर और पालक जैसी सब्जियों का सेवन सीमित मात्रा में ही करें।

मसाले और डेयरी उत्पादों का प्रभाव
भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाले मसाले सेहत पर बड़ा असर डालते हैं। पित्त के रोगियों को हल्दी, सौंफ, धनिया, केसर और इलायची का उपयोग करना चाहिए। ये मसाले पाचन में सहायक और शीतल होते हैं। इसके विपरीत, हींग, काली मिर्च और लाल मिर्च का अत्यधिक प्रयोग पित्त दोष को गंभीर बना सकता है। डेयरी उत्पादों में ठंडा दूध, घी और ताजी छाछ पित्त को शांत करने के लिए बेहतरीन विकल्प हैं। मांसाहार, विशेषकर जलीय जीवों के मांस से बचना चाहिए।

जीवनशैली में बदलाव है अनिवार्य
केवल भोजन ही नहीं, बल्कि आपकी आदतें भी पित्त को प्रभावित करती हैं। पित्त प्रधान लोगों को बहुत अधिक तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए। मन की शांति के लिए मधुर संगीत सुनना, शांत पानी के स्रोतों (जैसे फव्वारा या नदी किनारा) के पास समय बिताना लाभकारी होता है। प्राकृतिक मिठास के लिए गन्ने का रस या मिश्री का उपयोग किया जा सकता है। याद रखें, एक शांत मन और शीतल आहार ही पित्त दोष पर विजय पाने की कुंजी है।

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