कैशलेस इलाज पर टकराव : अस्पतालों-कंपनियों के झगड़े में फंसा कैशलेस इलाज
कैशलेस इलाज पर संकट के बादल
निजी अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच खींचतान
सितंबर से बंद हो सकती थी कैशलेस सुविधा
हेल्थ इंश्योरेंस लेने वाले ग्राहकों के लिए राहत की खबर है। निजी अस्पतालों और इंश्योरेंस कंपनियों के बीच चल रहे विवाद के बाद आशंका जताई जा रही थी कि कैशलेस इलाज (बिना नकदी भुगतान के) की सुविधा कभी भी बंद हो सकती है। हालांकि, इंश्योरेंस कंपनियों का कहना है कि बातचीत के बाद समाधान निकल आया है और फिलहाल कैशलेस इलाज की सुविधा जारी रहेगी।
विवाद की पृष्ठभूमि
एसोसिएशन ऑफ हेल्थ प्रोवाइडर्स इंडिया (एएचपीआई) ने हाल ही में बजाज आलियांज और केयर हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियों की कैशलेस सुविधा सितंबर से बंद करने की चेतावनी दी थी। वजह यह बताई गई थी कि इलाज की लागत सालाना 14% की दर से बढ़ रही है, लेकिन इंश्योरेंस कंपनियां भुगतान की दरों में समुचित वृद्धि नहीं कर रही हैं।
इंश्योरेंस कंपनियों का पक्ष
इंश्योरेंस कंपनियों का कहना है कि अस्पताल इलाज का खर्च बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं और पिछले कुछ वर्षों में हेल्थ इंश्योरेंस क्लेम में लगातार वृद्धि हुई है। वहीं, हर साल प्रीमियम पहले से ही 10% तक बढ़ता है। बीते तीन सालों में प्रीमियम में 15 से 30 प्रतिशत तक इजाफा दर्ज किया गया है।
मरीजों की चिंता
ग्राहकों के बीच यह संशय गहराने लगा था कि अस्पताल किसी भी वक्त कैशलेस इलाज देने से मना कर सकते हैं। ऐसे में उन्हें पहले खुद भुगतान करना होगा और बाद में क्लेम की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। जबकि, अधिकांश लोग हेल्थ इंश्योरेंस इसलिए खरीदते हैं ताकि आपात स्थिति में बिना पैसे खर्च किए अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा सकें।
सरकार और इरडा की नजर
भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) ने इस विवाद पर नजर रखी है। विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार को इसका स्थायी समाधान निकालना होगा, ताकि भविष्य में मरीजों को इलाज के वक्त किसी तरह की दिक्कत न हो।
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