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मौन सेवा का संकल्प: 17 वर्षों से समाज के उपेक्षित वर्गों में ज्ञान की लौ जला रहा डॉ. विनय कुमार वर्मा का 'चेतना मंच'

डॉ. विनय कुमार वर्मा के अनुसार, 'चेतना मंच' किसी शोर या दिखावे का नहीं, बल्कि मौन संकल्प का नाम है। पिछले 17 वर्षों से यह संस्था समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा और संवेदना पहुँचाने का कार्य कर रही है।

 
 

सत्रह वर्षों का अनवरत सेवा सफर

समाज के उपेक्षित चेहरों की सेवा

बिना शोर और प्रचार का संकल्प

मानवीय गरिमा और ज्ञान का प्रसार

आंतरिक पुकार से जन्मी अनूठी संस्था

कुछ कार्य ऐसे होते हैं जो शोर नहीं करते, कुछ संकल्प ऐसे होते हैं जो मंच नहीं खोजते, और कुछ संस्थाएँ ऐसी होती हैं जो प्रचार से नहीं, प्रभाव से पहचानी जाती हैं। चेतना मंच उसी मौन-संकल्प का नाम है- जो बीते सत्रह वर्षों से समाज के सबसे अनसुने कोनों में, सबसे उपेक्षित चेहरों के बीच, ज्ञान, संवेदना और मानवीय गरिमा का दीप जलाए हुए है। यह संस्था किसी घोषणा-पत्र से नहीं, बल्कि एक आंतरिक पुकार से जन्मी- कि यदि समाज में अँधेरा है, तो कोई न कोई दीपक जलाने की ज़िम्मेदारी ले।

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स्थापना : एक विचार से आंदोलन तक
सन 2010 में, जब अधिकांश लोग सामाजिक कार्य को भी प्रचार और पहचान की सीढ़ी मानने लगे थे, तब डॉ. विनय कुमार वर्मा ने कुछ संवेदनशील साथियों की उपस्थिति में चेतना मंच की स्थापना की।  न कोई भव्य मंच,न कोई चमकदार उद्घाटन- बस कुछ लोग और एक साझा संकल्प कि-“जो समाज से लिया है, उसे समाज को लौटाया जाए।”

शुरुआती दिनों में चेतना मंच का स्वरूप सीधा और सहज था- गरीबों को कपड़े बाँटना, ठंड में कंबल पहुँचाना, असहाय मरीजों का इलाज कराना,दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग दिलवाना, और निर्धन कन्याओं के विवाह में सम्मानपूर्वक सहयोग करना। ये सब कार्य किसी सूची या आँकड़े के लिए नहीं, बल्कि मानवीय कर्तव्य के भाव से किए गए।

ज्ञान ज्योति केंद्र : अँधेरे में उजास
समय के साथ चेतना मंच ने यह समझा कि यदि समाज को सचमुच सशक्त करना है, तो राहत नहीं- शिक्षा ही स्थायी समाधान है। यहीं से जन्म हुआ ज्ञान ज्योति केंद्रों का। मलिन बस्तियों, झुग्गी-झोपड़ियों, निर्माण स्थलों और हाशिए के इलाकों से उन बच्चों को इकट्ठा किया गया जो स्कूल तक कभी पहुँच ही नहीं पाए थे-  डरे हुए, असमंजस में,पर आँखों में सीखने की जिज्ञासा लिए। उन्हीं मलिन बस्तियों के बीच 'ज्ञान ज्योति केंद्र' स्थापित किए गए। इन केंद्रों में न कोई औपचारिक घंटी बजती है, न कोई डराने वाला अनुशासन- बस विश्वास, धैर्य और प्रेम के साथ अक्षर-ज्ञान कराया जाता है।

 आज तक लगभग 23,700 बच्चे इन्हीं ज्ञान ज्योति केंद्रों से निकलकर मुख्यधारा की शिक्षा से जुड़ चुके हैं। यह कोई साधारण आँकड़ा नहीं-  यह 23,700 परिवारों का भविष्य है। 

निरक्षर महिलाओं से सशक्त नागरिक तक चेतना मंच का कार्य केवल बच्चों तक सीमित नहीं रहा। समाज की वह आधी आबादी- जो पीढ़ियों से निरक्षरता के बोझ तले दबी थी, उसे भी इस यात्रा में साथ लिया गया। लगभग 4,770 निरक्षर महिलाओं को पढ़ना- लिखना सिखाया गया। अक्षर उनके लिए केवल शब्द नहीं थे, बल्कि आत्मविश्वास की कुंजी थे। जब कोई महिला पहली बार अपना नाम लिखती है, तो वह केवल स्याही नहीं बहाती-  वह अपनी पहचान दर्ज करती है।

मौन की साधना : बिना शोर का समाज-निर्माण
चेतना मंच की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह संस्था किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता स्वीकार नहीं करती। न किसी से नगद चंदा, न किसी प्रकार की मध्यस्थता। यदि कोई सहयोग करना चाहता है, तो उसे स्वयं सामने आना होता है-  पाठ्य सामग्री के साथ, या सीधे शिक्षा-प्रेरकों के खाते में मानदेय देकर। यहाँ न कोई बिचौलिया है, न कोई कमीशन, न किसी प्रकार की श्रेय-होड़। चेतना मंच से जुड़े सभी लोग यह कार्य स्वान्तः सुखाय करते हैं- क्योंकि उन्हें इसमें आत्मिक संतोष की अनुभूति होती है।

विस्तार : चेतना से चेतना तक
समय के साथ चेतना मंच एक संस्था नहीं, बल्कि एक परिवार बन गया-  जिसकी कई सक्रिय इकाइयाँ गठित हुईं। 

चेतना महिला मंच
महिलाओं की सुरक्षा, स्वावलंबन और कानूनी अधिकारों के लिए सतत सक्रिय। वर्तमान में संयोजक : आराधना गुप्ता हैं।

चेतना साहित्यिक मंच
जनपद के साहित्यकारों को जोड़कर सृजन, संवाद और विमर्श का नया वातावरण। वर्तमान में अध्यक्ष : डॉ. उमेश प्रसाद सिंह, महामंत्री : रामजी प्रसाद भैरव हैं।

चेतना सांस्कृतिक मंच
लोक कलाकारों, रंगकर्मियों और सांस्कृतिक साधकों का मंच। वर्तमान में संयोजक : पियूष मिश्रा, अध्यक्ष : ताहिर वारसी और  महामंत्री : प्रमोद अग्रहरि हैं ।

चेतना पर्यावरण मंच
पौधारोपण, संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता। वर्तमान में अध्यक्ष : सुजीत मिश्रा और  महामंत्री : मनोज सिंह हैं ।

चेतना स्पोर्ट्स मंच
खेल और खिलाड़ियों को अवसर व मंच। वर्तमान में संयोजक : कुमार नंद, अध्यक्ष : प्रदीप कुमार और महामंत्री : नवीन पाल हैं ।

चेतना रक्त, नेत्र व अंगदान मंच
जनजागरण और व्यावहारिक प्रेरणा। नेत्रदान में विशेष योगदान। वर्तमान में अध्यक्ष : विकास गर्ग और  महामंत्री : सरदार सुरेंद्र सिंह हैं ।

चेतना वरिष्ठ नागरिक मंच
वरिष्ठ नागरिकों का स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान। निःशुल्क दवाएँ व परामर्श। वर्तमान में अध्यक्ष : गिरीश प्रसाद हैं ।

चेतना युवा मंच
युवाओं को रोजगार, करियर और राष्ट्र सेवा के पप्रति जागरूक करना।वर्तमान में संयोजक : त्रिभुवन वर्मा हैं ।

चेतना भोजपुरी मंच
भोजपुरी भाषा और संस्कृति को संरक्षण और संबल। वर्तमान में अध्यक्ष : अतुल ओझा हैं।
           
इन सभी इकाइयों का समन्वय और मार्गदर्शन चेतना मंच परिवार करता है। 

नेतृत्व : पद नहीं, उत्तरदायित्व 
चेतना मंच का नेतृत्व किसी शक्ति-प्रदर्शन का नाम नहीं, बल्कि सेवा की निरंतरता है।

डॉ. विनय कुमार वर्मा - संस्थापक/संयोजक,
दयाराम जायसवाल - अध्यक्ष
उपाध्यक्ष : एडवोकेट हरिओम श्रीवास्तव, क्यामुद्दीन अंसारी,
सरदार सतपाल सिंह, एडवोकेट रंजीत सिंह एवं पारस चौरसिया।
 महामंत्री : प्रकाश चौरसिया, संयुक्त महामंत्री : मुकेश शर्मा।
 कोषाध्यक्ष : राजू इक़बाल।
सह-कोषाध्यक्ष : संतोष पांडेय।
मंत्री : आशीष श्रीवास्तव, किशोरी शर्मा, जनार्दन विश्वकर्मा, संतोष शर्मा।
 प्रवक्ता : धनंजय जायसवाल
उपरोक्त सभी लोगों के लिए पद नहीं-प्रयोजन महत्त्वपूर्ण है।

चेतना मंच : भविष्य की नींव
आज जब समाज त्वरित परिणाम और त्वरित प्रसिद्धि चाहता है, चेतना मंच
धैर्य और दीर्घकालीन परिवर्तन पर विश्वास करता है। जो बच्चे आज पढ़ रहे हैं, वे कल
इस देश के सुयोग्य नागरिक बनेंगे। जो महिलाएँ आज साक्षर हो रही हैं, वे आने वाली पीढ़ियों की पहली शिक्षक होंगी। 
 
चेतना मंच सिर्फ़ एक सामाजिक संस्था नहीं- यह एक जीवित विचार है, जो यह प्रमाणित करता है कि बिना शोर, बिना लोभ, बिना स्वार्थ भी समाज बदला जा सकता है। यदि नीयत साफ़ हो, तो साधन स्वयं रास्ता बना लेते हैं।

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