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मां-बाप की इस हरकत से खत्म हो रही है बच्चों की काबिलियत, स्कूल से लौटने के बाद घरों में कैद हो जा रहे बच्चे

इस अध्ययन में पाया गया कि 34% बच्चे स्कूल के बाद बाहर नहीं खेलते, जबकि लगभग 20% बच्चे केवल हफ्ते में एक बार बाहर खेलने का मौका पाते हैं।
 

स्कूल से लौटते ही घरों में कैद हो रहे बच्चे

7 से 12 वर्ष आयु वर्ग पर हुआ शोध

34% बच्चे स्कूल के बाद बाहर नहीं खेलते

घर में रहने वाले बच्चों में भावनात्मक समस्याएं ज्यादा

एक दौर था जब मां-बाप बच्चों को बाहर से पकड़कर घर लाते थे, लेकिन अब हालात बदल गए हैं। आज तीन में से एक बच्चा स्कूल से लौटने के बाद अपने ही घर में 'नजरबंद' हो जाता है। वह खेलने-कूदने के लिए बाहर नहीं जाता, जिससे विशेषज्ञों ने बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई है।

आपको बता दें कि ब्रिटेन के एक्सेटर विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने यूरोप और दक्षिण एशियाई देशों में 7 से 12 वर्ष आयु के बच्चों पर एक अध्ययन किया। इस अध्ययन में पाया गया कि 34% बच्चे स्कूल के बाद बाहर नहीं खेलते, जबकि लगभग 20% बच्चे केवल हफ्ते में एक बार बाहर खेलने का मौका पाते हैं। दक्षिण एशियाई देशों के बच्चों में यह समस्या अधिक देखी गई।

बच्चों के व्यवहार पर असर

अध्ययन में शामिल 2,500 से अधिक बच्चों से जानकारी जुटाई गई। शोधकर्ताओं ने बच्चों के सामाजिक और भावनात्मक कौशल को मापने के लिए अलग-अलग पैटर्न पर सवाल पूछे। इसमें पाया गया कि जो बच्चे नियमित रूप से बाहर खेलते हैं, उनमें सामाजिक कौशल 60% बेहतर पाया गया। वहीं घर में रहकर खेलने वाले बच्चों में भावनात्मक और व्यावहारिक समस्याएं ज्यादा पाई गईं।

लिंग आधारित आंकड़े

इस अध्ययन में 50.82% पुरुष और 49.18% महिलाओं को शामिल किया गया। परिणामों ने संकेत दिया कि बाहर खेलना बच्चों के आत्मविश्वास और सामाजिकता को मजबूत करता है।

समुदाय का प्रभाव

शोध में यह भी सामने आया कि कम वंचित समुदायों में रहने वाले बच्चों को बाहर खेलने से अधिक लाभ हुआ। वहीं, आर्थिक रूप से वंचित समुदायों में कई बच्चों को पढ़ाई के बाद काम करना पड़ता है, जिससे उनके खेलने का समय प्रभावित होता है।

विशेषज्ञों की राय

डॉ. फर्ग्यूसन ने कहा कि अगर बच्चों के खेलने के लिए सुरक्षित स्थानीय स्थान उपलब्ध कराए जाएं, तो उनके मानसिक स्वास्थ्य में बड़ा सुधार हो सकता है। बाहर खेलने से न केवल शारीरिक विकास होता है बल्कि भावनात्मक संतुलन और रचनात्मकता भी बढ़ती है।

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